सूरत : तापी नदी में फिर बढ़ी जलकुंभी की समस्या, पानी की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा
सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं
सूरत। सूरत में गर्मी की शुरुआत के साथ ही तापी नदी में जलकुंभी (वॉटर हायसिंथ) की समस्या एक बार फिर गंभीर होती जा रही है। यह नदी शहर के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है, ऐसे में बढ़ती जलकुंभी और गाद की मात्रा पानी की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है।
नगर निगम द्वारा जलकुंभी हटाने के लिए वियर क्षेत्र में डिवाइडर मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। कई जगहों पर जलकुंभी के बड़े-बड़े गुच्छे जमा हो गए हैं, जिससे जलाशय में पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है।
जानकारों का कहना है कि जलकुंभी की अधिकता से पहले भी नगर निगम के वॉटर वर्क्स प्रभावित हो चुके हैं। इसके बावजूद, वर्तमान में सफाई कार्य संतोषजनक नहीं दिख रहा है। कुछ स्थानों से गंदा पानी और अपशिष्ट भी नदी में मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे समस्या और बढ़ रही है।
पिछले मानसून में कॉजवे के ओवरफ्लो होने के कारण यह समस्या अस्थायी रूप से कम हो गई थी, लेकिन अब फिर से जलकुंभी तेजी से फैल रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अगर समय रहते सफाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में पानी की गुणवत्ता में गिरावट और सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ सकता है।
शहरवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द प्रभावी सफाई अभियान चलाने और तापी नदी को प्रदूषणमुक्त बनाए रखने की मांग की है।
