सूरत नगर निगम में 'प्रशासक राज' शुरू: मिलिंद तोरवने ने संभाली कमान, पार्षदों का कार्यकाल समाप्त

11 मार्च को पूरा हुआ जनप्रतिनिधियों का 5 साल का टर्म; अब चुनाव तक पूर्व कमिश्नर तोरवाने लेंगे शहर के सभी बड़े फैसले

सूरत नगर निगम में 'प्रशासक राज' शुरू: मिलिंद तोरवने ने संभाली कमान, पार्षदों का कार्यकाल समाप्त

सूरत। सूरत नगर निगम (एसएमसी) में पांच साल के निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही शहर की कमान अब नौकरशाही के हाथों में आ गई है। राज्य सरकार के आदेशानुसार, वरिष्ठ सिविल सर्वेंट मिलिंद तोरवने ने गुरुवार शाम को आधिकारिक तौर पर सूरत नगर निगम के प्रशासक (Administrator) का पदभार संभाल लिया है।

मिलिंद तोरवने सूरत के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। वे साल 2014 से 2016 तक सूरत के म्युनिसिपल कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शहर की कार्यप्रणाली और भौगोलिक स्थिति से उनके पुराने जुड़ाव को देखते हुए, सरकार ने उन्हें अगले स्थानीय निकाय चुनावों तक शहर के सभी नीतिगत  और प्रशासनिक फैसले लेने की जिम्मेदारी सौंपी है।

सूरत नगर निगम के चुने हुए जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 11 मार्च को समाप्त हो गया। इसके साथ ही मेयर, स्थायी समिति के अध्यक्ष और अन्य सभी पदाधिकारियों ने अपने पदों से आधिकारिक तौर पर विदाई ले ली है।

नगर निगम का बोर्ड भंग होने के बाद अब सभी शक्तियां प्रशासक के पास केंद्रित हो गई हैं।अगले चुनाव के बाद नया बोर्ड बनने तक, बजट से लेकर शहर के विकास प्रोजेक्ट्स तक के सभी निर्णय मिलिंद तोरवने द्वारा लिए जाएंगे।

एक तरफ जहां प्रशासक ने बागडोर संभाल ली है, वहीं दूसरी तरफ शहर में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। पार्षदों का कार्यकाल पूरा होते ही आगामी चुनावों के लिए दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।पुराने पार्षदों के साथ-साथ नए चेहरे भी अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए पार्टी आलाकमान के चक्कर काट रहे हैं।

विभिन्न राजनीतिक दलों ने आगामी नगर निगम चुनावों के लिए अपनी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूरत शहर के विकास कार्यों की गति बनाए रखना प्रशासक तोरवने के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों होगा।

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