सूरत : मानवता की मिसाल: स्व. वीरजीभाई धोणिया का देहदान और नेत्रदान
डॉ. प्रफुलभाई शिरोया के मार्गदर्शन में परिवार ने लिया प्रेरक निर्णय, चिकित्सा शिक्षा और नेत्रहीनों के लिए समर्पित किया शरीर
सूरत शहर के गजेरा सर्कल स्थित लक्ष्मी रेसिडेंसी में निवासरत तथा राजकोट जिला के गोंडल स्थित देवछड़ी ग्राम के मूल निवासी स्व. वीरजीभाई परबतभाई धोणिया के निधन पर उनके परिवार ने मानवता की प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए देहदान एवं नेत्रदान का निर्णय लिया।
परिवार के पुत्र नयनभाई और अमितभाई सहित सभी परिजनों, संबंधियों, मित्रों और पड़ोसियों की सहमति से लोक दृष्टि चक्षु बैंक को नेत्रदान किया गया। नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए चक्षु बैंक के उपाध्यक्ष दिनेशभाई जोगाणी तथा डॉ. राजकिशोर बेहेरा ने सेवा प्रदान की, जबकि नाथालाल गजेहरा और पार्थभाई जोगाणी ने सहयोग दिया।
इसके साथ ही, इंडियन रेड क्रास सोसायटी की चोर्यासी तालुका शाखा के चेयरमैन डॉ. प्रफुलभाई शिरोया के मार्गदर्शन में देहदान सूरत स्थित स्मीमेर मेडिकल कालेज (एनाटॉमी विभाग) को चिकित्सा विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु समर्पित किया गया।
इस अवसर पर लायंस क्लब ऑफ सूरत इष्ट के अध्यक्ष किशोरभाई मांगरोलिया, जोन चेयरमैन जगदीशभाई बोडरा, सक्षम सूरत महानगर के सदस्य, लोक दृष्टि चक्षु बैंक के ट्रस्टी तथा रेड क्रॉस सोसायटी के सदस्यों ने परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्व. वीरजीभाई धोणिया को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान दिनेशभाई जोगाणी ने उपस्थित लोगों को नेत्रदान, देहदान और अंगदान के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कॉर्निया की बीमारी से पीड़ित अंधत्व के मरीजों को नई रोशनी देने के लिए समाज के अधिक से अधिक लोगों को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवित रहते रक्तदान और मृत्यु के बाद नेत्र, देह व अंगदान को सर्वोत्तम दान माना जाता है।
