सूरत : ईद और शादियों के सीजन ने टेक्सटाइल बाजार में भरी रफ्तार
हर दिन देशभर की मंडियों के लिए निकल रहे 400 ट्रक; ट्रांसपोर्टरों के पास नई बुकिंग के लिए जगह नहीं
सूरत। दिवाली के बाद मंदी की मार झेल रहे सूरत के टेक्सटाइल बाजार में अब फिर से रौनक लौट आई है। फरवरी की शुरुआत के साथ ही ईद और शादियों के सीजन ने व्यापार में नई जान फूंक दी है। देशभर की मंडियों से अचानक ऑर्डर बढ़ने से उत्पादन और डिस्पैच दोनों में तेज़ी आ गई है।
करीब एक महीने पहले तक जहां सूरत से प्रतिदिन लगभग 150 ट्रक कपड़ा देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे जा रहे थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 350 से 400 ट्रक प्रतिदिन हो गई है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में आई यह उछाल बताती है कि रिटेल मार्केट में सूरत के कपड़े की मांग कितनी मजबूत है।
ईद और विवाह सीजन एक साथ आने से साड़ियों, ड्रेस मटीरियल और सूट-दुपट्टों की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, इस डबल सीजन के चलते बाजार में काम का दबाव इतना अधिक है कि उन्हें फुर्सत तक नहीं मिल रही।
माल के अचानक बढ़े डिस्पैच ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। सीमित ट्रकों और संसाधनों के कारण कई कंपनियां नई बुकिंग लेने में असमर्थ हैं। कुछ बड़ी एजेंसियों ने अस्थायी रूप से बुकिंग रोक दी है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार में खरीदारी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज़ है।
फेडरेशन ऑफ टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर कैलाश हकीम के अनुसार, सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का सालाना टर्नओवर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये है। दिसंबर से अप्रैल तक का समय उद्योग के लिए सबसे अहम होता है, क्योंकि सालाना कारोबार का लगभग 40 प्रतिशत इन्हीं पांच महीनों में होता है। इस बार ईद और शादी सीजन से रिकॉर्ड व्यापार की उम्मीद जताई जा रही है।
सूरत में 240 से अधिक टेक्सटाइल मार्केट का विशाल क्लस्टर है, जिसमें करीब 70,000 दुकानें संचालित हो रही हैं। रिंग रोड समेत प्रमुख इलाकों में इन दिनों टेंपो और ट्रकों की लगातार आवाजाही देखी जा सकती है। पूरे क्षेत्र में कपड़े के बंडलों की ढुलाई शहर की आर्थिक सक्रियता का संकेत दे रही है।
तेज़ डिमांड को पूरा करने के लिए व्यापारी अब प्राइवेट गाड़ियों और लग्जरी बसों के पार्सल सेक्शन का भी उपयोग कर रहे हैं, ताकि गुजरात और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों में समय पर माल पहुंचाया जा सके। जिन क्षेत्रों में ट्रकों को पहुंचने में अधिक समय लगता है, वहां छोटी गाड़ियों से सप्लाई की जा रही है।
व्यापारियों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो इस सीजन में सूरत का टेक्सटाइल उद्योग नए रिकॉर्ड बना सकता है। पूरे बाजार में इस समय उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिल रहा है।
