2034-35 तक 35000 मेगावाट होगी गुजरात में बिजली डिमांड, ट्रांसमिशन नेटवर्क पर फोकस जरूरी
इंडस्ट्रियल ग्रोथ और रिन्यूएबल एनर्जी के साथ ग्रिड मजबूत करना जरूरी
अहमदाबाद (गुजरात), फरवरी 27: गुजरात में आने वाले 10 साल में बिजली की डिमांड तेजी से बढ़ने वाली है। बिजली उत्पादन के लिए प्रदेश में पावर प्लांट और सोलर और विंड पार्क की चर्चा होती है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि असली चुनौती ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करना है।
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की पीक पावर डिमांड 2023-24 में करीब 20,964 मेगावाट थी, जो 2034-35 तक बढ़कर 35,000 मेगावाट से ज्यादा हो सकती है। इसी दौरान सालाना बिजली खपत 240 बिलियन यूनिट (बीयू) के पार पहुंचने का अनुमान है। यह मौजूदा खपत से लगभग दोगुना है।
गुजरात में इंडस्ट्रियल ग्रोथ तेजी से हो रही है। नए मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, डेटा सेंटर, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब बन रहे हैं। अभी राज्य की करीब आधी बिजली इंडस्ट्री इस्तेमाल करती है। आने वाले समय में यह हिस्सा और बढ़ सकता है।
एनर्जी एक्सपर्ट सद्दाफ आलम कहते हैं, “सिर्फ पावर जनरेशन बढ़ाना काफी नहीं है। अगर ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत नहीं होगा तो बनी हुई बिजली भी सही जगह तक नहीं पहुंच पाएगी। बिना मजबूत ग्रिड के सरप्लस पावर भी बेकार हो सकती है।”
2034-35 तक गुजरात में सोलर और विंड एनर्जी मिलकर कुल कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा बन सकती हैं। वहीं कोल पावर का हिस्सा घटेगा। लेकिन एक बड़ी चुनौती है।
ज्यादातर सोलर और विंड प्रोजेक्ट कच्छ और सौराष्ट्र में हैं, जबकि अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और साउथ गुजरात इंडस्ट्रियल एरिया बड़े लोड सेंटर हैं। यानी जहां बिजली बन रही है और जहां जरूरत है, उनके बीच लंबी दूरी है।
एक अन्य एक्सपर्ट कहते हैं, “रिन्यूएबल एनर्जी बिना मजबूत ट्रांसमिशन के अधूरी है। आप सस्ती बिजली बना सकते हैं, लेकिन अगर उसे समय पर और सही जगह नहीं पहुंचा पाए तो फायदा नहीं होगा।
आने वाले वर्षों में गुजरात को 10 गीगावाट से ज्यादा बैटरी स्टोरेज की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन स्टोरेज सिस्टम भी तभी काम करेगा जब ग्रिड मजबूत हो और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बिजली का फ्लो आसानी से हो सके।”
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रांसमिशन को हाईवे, पोर्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जितना ही महत्व दिया जाना चाहिए। ट्रांसमिशन लाइन मजबूत करना, सबस्टेशन अपग्रेड करना, राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) की दिक्कत कम करना और नए हाई-कैपेसिटी कॉरिडोर बनाना समय की जरूरत है।
एक अन्य विशेषज्ञ के अनुसार, “पावर डिमांड बढ़ती रहेगी, जनरेशन सोर्स बदलते रहेंगे, लेकिन ट्रांसमिशन ही पूरा सिस्टम जोड़कर रखता है। अगर गुजरात को रिलाएबल, अफॉर्डेबल और क्लीन पावर चाहिए तो ट्रांसमिशन में निवेश बढ़ाना ही होगा।”
