सूरत : डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 पर जागरूकता व प्रशिक्षण कार्यशाला
चैंबर ऑफ कॉमर्स की पहल, विशेषज्ञों ने कंपनियों को समय पर अनुपालन की दी सलाह
सूरत : सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को समृद्धि, नानपुरा स्थित सभागार में ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023’ विषय पर अवेयरनेस और ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यमियों, व्यापारियों और पेशेवरों को नए डेटा संरक्षण कानून के प्रावधानों और दायित्वों से अवगत कराना था।
कार्यक्रम में S.R.A. लीगल के एसोसिएट पार्टनर कृष्ण अग्रवाल और स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की सीनियर लीगल मैनेजर सुश्री रितिका दास ने विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
चैंबर के मानद कोषाध्यक्ष सीए मितेश मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए डिजिटल इंडिया अभियान के दौर में डेटा का महत्व कई गुना बढ़ गया है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 लागू होने के बाद प्रत्येक उद्योग और संगठन के लिए डेटा संरक्षण कानून को समझना और उसका पालन करना अनिवार्य हो गया है।
कृष्ण अग्रवाल ने पर्सनल डेटा की परिभाषा स्पष्ट करते हुए बताया कि डिजिटल माध्यम से एकत्र की गई व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने डेटा प्रिंसिपल, डेटा फिड्यूशरी (डेटा संग्रह और प्रोसेस करने वाले संगठन) तथा ‘महत्वपूर्ण डेटा फिड्यूशरी’ की अवधारणा समझाई। बैंक और बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां लागू होती हैं।
उन्होंने डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक नियामक एवं प्रवर्तन प्राधिकरण है, जिसे कानून उल्लंघन की स्थिति में भारी जुर्माना लगाने का अधिकार है। इसलिए संगठनों के लिए समय पर अनुपालन अत्यंत जरूरी है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि कंपनियां स्पष्ट डेटा सुरक्षा नीति तैयार करें, आंतरिक नियंत्रण तंत्र मजबूत करें और डेटा सुरक्षा प्रणाली लागू करें। साथ ही, दंड प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करें।
सुश्री रितिका दास ने कॉर्पोरेट स्तर पर डेटा गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और आंतरिक नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने केस स्टडी के माध्यम से समझाया कि किसी भी संगठन को केवल आवश्यक और प्रासंगिक डेटा ही एकत्र करना चाहिए। ‘मिनिमम डेटा कलेक्शन’ सिद्धांत को अपनाना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन फॉर्म में पहले से टिक किए गए चेक बॉक्स के जरिए सहमति लेना उचित नहीं है। सहमति स्पष्ट, स्वैच्छिक और सूचित होनी चाहिए। कोई भी संगठन किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत डेटा देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। डेटा सुरक्षा केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
कार्यक्रम की रूपरेखा ग्रुप चेयरमैन दीपक कुमार सेठवाला ने प्रस्तुत की, जबकि डॉ. अनिल सरावगी ने कार्यक्रम का संचालन किया और उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
वर्कशॉप में बड़ी संख्या में उद्यमियों, व्यापारियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से अपने संदेह दूर किए। कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताया गया।
