सूरत : एफटीए और बजट से भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर मिलेगा बड़ा अवसर
USA, EU और UK के साथ संभावित एफटीए से ड्यूटी घटेगी, बजट से उत्पादन व प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी : गिरधर गोपाल मूंदड़ा
भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए अमेरिका (USA), यूरोपियन यूनियन (EU) और यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ प्रस्तावित अथवा संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) तथा हालिया केंद्रीय बजट का संयुक्त प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन दोनों के मिलकर असर से भारत ग्लोबल टेक्सटाइल सप्लाई चेन में एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है, जिससे लगभग 45 लाख करोड़ रुपये के अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच संभव होगी। यह विचार प्रतिष्ठित कपड़ा कारोबारी गिरधर गोपाल मूंदड़ा ने व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में EU, UK और USA में भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट्स पर 8 से 12 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है, जबकि बांग्लादेश, वियतनाम और कुछ अन्य देशों को ड्यूटी फ्री या रियायती टैरिफ का लाभ मिलता है। एफटीए लागू होने की स्थिति में भारतीय उत्पादों पर लगने वाली यह ड्यूटी कम या पूरी तरह समाप्त हो सकती है। इससे भारतीय टेक्सटाइल, विशेषकर रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल, मैन-मेड फाइबर (MMF) आधारित फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल की कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी। परिणामस्वरूप निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे और EU, UK व USA में भारत का मार्केट शेयर मजबूत होगा।
दूसरी ओर, हालिया बजट टेक्सटाइल सेक्टर को देश के भीतर मजबूत बनाने का कार्य करता है। बजट में PM MITRA टेक्सटाइल पार्क, PLI स्कीम, टेक्निकल टेक्सटाइल को बढ़ावा देने के लिए सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना, आसान क्रेडिट व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इन कदमों से उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, टेक्नोलॉजी अपग्रेड होगी और उत्पादों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनेगी। इससे कच्चे कपड़े के साथ-साथ वैल्यू-एडेड गारमेंट्स और फिनिश्ड प्रोडक्ट्स का निर्यात भी बढ़ेगा।
गिरधर गोपाल मूंदड़ा के अनुसार, एफटीए और बजट का संयुक्त प्रभाव यह होगा कि एक ओर विदेशी बाजारों में भारतीय टेक्सटाइल के लिए नए दरवाजे खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर उत्पादन लागत, गुणवत्ता और स्केल में सुधार होगा। इससे निवेश बढ़ेगा, नई यूनिट्स स्थापित होंगी और रोजगार के बड़े अवसर सृजित होंगे। सूरत, तिरुपुर, लुधियाना सहित देश के अन्य प्रमुख टेक्सटाइल क्लस्टर्स को इसका विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ चुनौतियां बनी रहेंगी, जैसे MSME सेक्टर पर वर्किंग कैपिटल का दबाव, लंबा पेमेंट साइकिल और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण व श्रम मानकों का अनुपालन। इसके बावजूद, यदि नीतियों का सही और प्रभावी क्रियान्वयन किया गया, तो एफटीए और बजट मिलकर भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को तेज, टिकाऊ और निर्यात-आधारित विकास की दिशा में आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
