सूरत : जिस दिन होनी थी बेटी की विदाई, उसी दिन दुनिया छोड़ गए बिल्डर तुषार घेलानी

ब्रेन डेड होने के बाद परिवार ने लिया था अंगदान का फैसला; अंतिम समय में आए हार्ट अटैक के कारण केवल 'चक्षुदान' ही हुआ संभव

सूरत : जिस दिन होनी थी बेटी की विदाई, उसी दिन दुनिया छोड़ गए बिल्डर तुषार घेलानी

सूरत। सूरत के जाने-माने बिल्डर तुषार घेलानी के निधन से पूरे शहर और व्यापारिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस तारीख को उनकी बेटी की शादी तय थी, उसी दिन पिता की अंतिम यात्रा निकली। चार दिनों तक अस्पताल में मौत से जूझने के बाद तुषारभाई जिंदगी की जंग हार गए।

गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती तुषार घेलानी को बुधवार को डॉक्टरों ने 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया था। इस अपार दुख के बीच भी उनके परिवार ने साहस दिखाते हुए अंगदान (Organ Donation) का फैसला किया, ताकि दूसरों को जीवन मिल सके। परिवार की सहमति के बाद 'डोनेट लाइफ' संस्था और अहमदाबाद के जायडस हॉस्पिटल की मेडिकल टीमें अंगदान की प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार थीं।

अंगदान की कानूनी और मेडिकल प्रक्रियाएं चल ही रही थीं कि अचानक तुषारभाई को ज़ोरदार कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) आया। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए करीब 20 मिनट तक CPR दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

'डोनेट लाइफ' के संस्थापक नीलेश मंडलेवाला ने बताया "ब्रेन डेड घोषित होने के बाद हम लिवर और अन्य अंगों के दान की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक आए हार्ट अटैक की वजह से हृदय की गति रुक गई। हृदय रुक जाने के बाद किडनी, लिवर या हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों का दान संभव नहीं हो पाता। इसलिए, अंततः केवल चक्षुदान (Eye Donation) ही संपन्न हो सका।"

तुषार घेलानी के निधन की खबर मिलते ही उद्योगपति मुकेश पटेल, समाजसेवी महेश सवाणी सहित शहर के कई दिग्गज और मित्र अस्पताल पहुंचे। उमरा श्मशान घाट पर गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

जिस घर में बेटी की शादी की शहनाइयां गूंजनी थीं, वहां आज सन्नाटा और मातम पसरा है। परिवार के इस कठिन समय में अंगदान के फैसले की सराहना की जा रही है, क्योंकि उनके चक्षुदान से अब दो लोगों के जीवन में नई रोशनी आएगी।