सूरत : चैंबर ने केंद्र को भेजे प्री-बजटमोरेंडम में 15 क्रांतिकारी सुझाव,इनकम टैक्स में 'ब्लॉक असेसमेंट' और टेक्सटाइल रॉ मटेरियल पर 'ज़ीरो ड्यूटी' की मांग
ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस पर ज़ोर: CBDT के लिए SOP और MSME टर्नओवर लिमिट ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव
सूरत। सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) ने आगामी केंद्रीय बजट से पूर्व केंद्र सरकार को प्री-बजट मेमोरेंडम भेजते हुए सूरत और पूरे दक्षिण गुजरात के व्यापार-उद्योग से जुड़े 15 अहम सुझाव प्रस्तुत किए हैं। यह जानकारी चैंबर के प्रेसिडेंट निखिल मद्रासी ने दी।
उन्होंने बताया कि इन सुझावों का उद्देश्य टैक्स विवाद कम करना, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को मज़बूत करना और नॉन-एडवर्सरियल टैक्स सिस्टम को प्रभावी बनाना है।
मुख्य टैक्स संबंधी सुझाव
CBDT द्वारा स्पष्ट SOP जारी करने की मांग – हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों को ध्यान में रखते हुए RBI की तरह SOP जारी हो, ताकि फील्ड लेवल पर एकरूपता रहे और विवाद कम हों।
ब्लॉक असेसमेंट सिस्टम – हर साल स्क्रूटनी के बजाय 2-3 साल के ब्लॉक के लिए असेसमेंट लागू किया जाए।
ट्रांसफर प्राइसिंग के लिए अलग असेसमेंट सिस्टम और स्पेशलाइज्ड ऑफिसर्स की नियुक्ति।
सेक्शन 158AB का प्रभावी अमल – सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामलों में अपील न कर प्रोटेक्टिव असेसमेंट अपनाया जाए।
रिवाइज्ड रिटर्न से किए गए क्लेम को वैध माना जाए।
एक्सप्लेनेटरी प्रोविज़न को पुनः लागू करने और री-असेसमेंट नोटिस के लिए न्यूनतम 15 दिन का समय देने की मांग।
रिवाइज्ड एवं बिलेटेड रिटर्न की डेडलाइन 31 मार्च तक।
रिफंड में देरी पर 9% ब्याज और 30 दिन में रिफंड की समय-सीमा तय हो।
पिछले पीरियड के वास्तविक बिज़नेस खर्चों को कटौती की अनुमति।
सेक्शन 5AD के तहत बिज़नेस लॉस का सेट-ऑफ।
माइक्रो एंटरप्राइज़ेज़ के लिए प्रिज़म्पटिव टैक्सेशन लिमिट ₹2 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़।
TDS रेट्स को सरल कर केवल 3 स्लैब तक सीमित किया जाए।
GST के B2B ट्रांज़ैक्शन पर सेक्शन 194Q हटाया जाए।
DPIIT रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स को सेक्शन 79 में नुकसान आगे बढ़ाने से छूट।
अपडेटेड रिटर्न (सेक्शन 139(8A)) की शर्तों में राहत।
टेक्सटाइल एवं इंडस्ट्री से जुड़े प्रमुख प्रस्ताव
PTA और MEG पर ज़ीरो इंपोर्ट ड्यूटी
MMF (पॉलिएस्टर) यार्न पर ज़ीरो ड्यूटी
सिल्क यार्न (HSN 5002) पर कस्टम ड्यूटी में कमी
TTDS / A-Tuff स्कीम के लिए ₹1,000 करोड़
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए ₹100 करोड़
यार्न बैंक व ग्रुप वर्कशेड स्कीम के लिए ₹50 करोड़
सस्टेनेबल टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हेतु ₹500 करोड़
MSE-CDP स्कीम में CFA लिमिट ₹50 करोड़
ट्रेडर्स को MSME डेफिनिशन में शामिल करने की मांग
MSMEs के लिए PLI, R&D और प्रोडक्ट डेवलपमेंट इंसेंटिव स्कीम
स्पेशियलिटी केमिकल सेक्टर को इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टेटस
लॉजिस्टिक्स लागत घटाने हेतु एयर कार्गो डेवलपमेंट फंड
चैंबर के प्रेसिडेंट निखिल मद्रासी ने कहा कि यदि इन सुझावों को बजट में शामिल किया जाता है तो इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, टैक्स विवाद घटेंगे और दक्षिण गुजरात के व्यापार को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
