वडोदरा : भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष गुजरात से श्रीलंका रवाना, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल रहे साक्षी
वडोदरा से दिल्ली होते हुए नए साल पर कोलंबो पहुंचेंगे बुद्ध के अवशेष, भारत–श्रीलंका सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष अब शेरों की धरती गुजरात से सिंहल द्वीप श्रीलंका की यात्रा पर निकल पड़े हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में वडोदरा से इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के अवशेषों को श्रीलंका भेजने का भव्य और पावन समारोह आयोजित किया गया। बड़ौदा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में सुरक्षित रखे गए ये पवित्र अवशेष नए साल के अवसर पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंचेंगे, जहां 4 से 11 फरवरी तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखे जाएंगे।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल वडोदरा के प्राचीन विमलेश्वर महादेव मंदिर के समीप आयोजित विदाई जुलूस में शामिल हुए। इस अवसर पर वडोदरा सिटी पुलिस की टुकड़ी ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने भक्तों के दर्शन के लिए इन अवशेषों को कोलंबो भेजे जाने के पवित्र समारोह में सहभागिता की।
ये अवशेष भगवान बुद्ध की अस्थियों सहित आठवीं शताब्दी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हैं, जिन्हें महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी, बड़ौदा में संरक्षित किया गया है। इन्हें वडोदरा से दिल्ली भेजा गया, जहां से विशेष व्यवस्था के तहत श्रीलंका रवाना किया जाएगा। यह पहल वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी के श्रीलंका दौरे के दौरान भारत–श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और सुदृढ़ करने पर बनी सहमति के अनुरूप की जा रही है।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री हर्षभाई संघवी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली से इन पवित्र अवशेषों को श्रीलंका भेजेगा। इसके साथ ही महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी, बड़ौदा के चार प्रोफेसर भी कोलंबो जाएंगे।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल मंगलवार को दोपहर में यूनिवर्सिटी के सयाजीगंज कैंपस स्थित पुरातत्व एवं प्राचीन अध्ययन विभाग पहुंचे, जहां विदेशी विद्यार्थियों ने उनका स्वागत किया। बाद में मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने संग्रहालय का दौरा किया। बौद्ध भिक्षुओं द्वारा पवित्र मंत्रोच्चार किया गया, मुख्यमंत्री ने पुष्प अर्पित किए और पवित्र अवशेषों को संग्रहालय से बाहर लाया गया। इस अवसर पर महाबोधि सोसाइटी के बौद्ध भिक्षु श्री आनंद, श्री विचित्ता, श्री उगसेन और श्री पनातिका भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पवित्र अवशेषों को एक विशेष वाहन में सुरक्षित रखकर शोभायात्रा निकाली गई, जिसके बाद इन्हें हवाई मार्ग से दिल्ली भेजा गया। इन अवशेषों में भगवान बुद्ध की अस्थियों का बक्सा, रेशमी वस्त्र से सुसज्जित पात्र तथा पत्थर से ढका ढक्कनयुक्त बक्सा शामिल है, जिसे चांदी और सोने के तारों से अलंकृत किया गया है। इस पर ब्राह्मी लिपि और संस्कृत में ‘दशबल शरीर निलय’ अंकित है, जिसका अर्थ भगवान बुद्ध के अवशेषों का स्थान होता है।
ये पवित्र अवशेष गुजरात के शामलाजी के समीप देवनी मोरी नामक टीले की खुदाई के दौरान प्राप्त हुए थे। इस क्षेत्र की पहचान वर्ष 1957 में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के प्रो. एस. एन. चौधरी ने की थी। 1960 के बाद चरणबद्ध खुदाई में यहां आठवीं शताब्दी का एक विशाल बुद्ध विहार होने के प्रमाण मिले, जिसे हीनयान की सम्मितीय शाखा से संबंधित माना जाता है। यह विहार समय के साथ भुला दिया गया था।
इस ऐतिहासिक अवसर पर विधायक पिंकीबेन सोनी, योगेशभाई पटेल, केयूरभाई रोकड़िया, चैतन्यभाई देसाई, राजमाता शुभांगिनी देवी गायकवाड़, कुलाधिपति श्री भणगे, अग्रणी जयप्रकाश सोनी, रसिकभाई प्रजापति, पुलिस आयुक्त नरसिंहा कोमर, मनपा आयुक्त अरुण महेश बाबू, कलेक्टर डॉ. अनिल धामेलिया तथा पुरातत्व विभाग की डीन सुष्मिता सेन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
