सूरत : अडाजन रिवरफ्रंट पर ‘7वां तापी हॉर्स शो-2026’ संपन्न, 1.20 लाख से अधिक लोगों ने लिया हॉर्स कल्चर का आनंद
चार दिवसीय हॉर्स फेस्टिवल में 340 से अधिक घोड़े बने आकर्षण, काठियावाड़ी–मारवाड़ी नस्लों को मिला बढ़ावा
सूरत। गुजरात स्टेट एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट और सूरत हॉर्स सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में अडाजन केबल ब्रिज रिवरफ्रंट पर आयोजित ‘7वां तापी हॉर्स शो-2026’ का शानदार समापन हुआ।
चार दिनों तक चले इस भव्य हॉर्स फेस्टिवल में घोड़ों की ताकत, गति और सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसे देखने के लिए 1 लाख 20 हजार से अधिक दर्शक पहुंचे।
इस हॉर्स शो में गुजरात के सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र से आई मारवाड़ी, काठियावाड़ी, कच्छी और सिंधी नस्लों के 340 से अधिक घोड़े आकर्षण का केंद्र रहे। भारत के प्रसिद्ध घोड़े ब्रह्मोस, शिवराज, कबीर, भैरव, दिलराज, भारत विजय, राधा, कायरा और रोनाल्डो ने अपनी मौजूदगी से दर्शकों का मन मोह लिया।
खास आकर्षण के रूप में स्टैलियन कैटेगरी में सात बार विजेता रह चुका घोड़ा ‘RP’ भी लोगों के लिए खास चर्चा का विषय बना। चार दिनों तक चले विभिन्न रोमांचक मुकाबलों में घोड़ों और सवारों के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। टेंट पेगिंग, हॉर्स डांस, बैरल रेस, मिल्क टीथ फिली–कोल्ट, गारो लेवो और म्यूजिकल चेयर जैसे खेलों ने दर्शकों को रोमांचित किया। घोड़ों की ‘रेवाल चाल’ और हॉर्स कार्ट राइडिंग ने भी खूब तालियां बटोरीं।
भावनगर के गोहिलवाड़ पोलो क्लब के घोड़ों ने शो की शोभा बढ़ाई, जबकि थोरब्रेड नस्ल के 10 से अधिक घोड़ों ने विभिन्न स्पर्धाओं में भाग लिया। आयोजन के दौरान सूरत एनिमल हसबैंड्री विभाग के डिविजनल जॉइंट डायरेक्टर डॉ. के.एम. डामोर सहित पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम भी मौजूद रही।
गौरतलब है कि राज्य सरकार भारतीय मूल की घोड़ा नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक ब्रीडिंग को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। आगामी बजट में हर वर्ष राज्य में तीन हॉर्स शो आयोजित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही राज्य सरकार और सूरत हॉर्स सोसाइटी मिलकर विभिन्न नस्लों के लिए नए ब्रीडिंग सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी प्रयासरत हैं।
आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को पशु खेलों और समृद्ध हॉर्स कल्चर से जोड़ना, पशुपालकों को प्रोत्साहन देना और गुजरात की पारंपरिक घोड़ा संस्कृति को पुनर्जीवित करना है।
