सूरत : टेक्सटाइल इंडस्ट्री के स्तंभ भरत गांधी का निधन, उद्योग जगत में शोक की लहर
सूरत एयरपोर्ट और सरसाना ट्रेड सेंटर के विजनरी थे भरत गांधी; औद्योगिक जगत के साथ समाज सेवा में भी छोड़ी अमिट छाप
सूरत। सूरत टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने शुक्रवार रात अपने सबसे दूरदर्शी और प्रभावशाली उद्योगपतियों में से एक श्री भरतभाई गांधी को खो दिया। 75 वर्ष की उम्र में, अल्प बीमारी के बाद उन्होंने सूरत के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल उद्योग जगत, बल्कि सामाजिक और संस्थागत क्षेत्रों में भी अपूरणीय क्षति हुई है।
14 नवंबर 1950 को जन्मे भरतभाई गांधी ने साधारण शुरुआत से असाधारण विरासत तक का सफर तय किया। मुंबई की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने JJ Sons पार्टनरशिप फर्म के साथ अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया। वर्ष 1980 में सूरत आकर उन्होंने उस समय उभरते टेक्सटाइल हब में अपने उद्योग की नींव रखी, जिसने आगे चलकर पूरे सेक्टर की दिशा बदल दी।
उधना में पावरलूम की शुरुआत कर उन्होंने सूरत के औद्योगिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। जापान से प्रीमियम बैम्बर्ग यार्न और चीन से प्योर सिल्क आयात कर उन्होंने हाई-क्वालिटी सिल्क फैब्रिक के उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी डाइंग-ब्लीचिंग यूनिट बैटसंस टेक्सटाइल्स नवाचार और गुणवत्ता की पहचान बनी और MMF सेगमेंट में नए बेंचमार्क स्थापित किए।
उद्योगपति होने के साथ-साथ भरत गांधी एक सम्मानित इंडस्ट्री लीडर और सर्वसम्मति से निर्णय लेने वाले व्यक्तित्व थे। 2000-01 में सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सूरत एयरपोर्ट के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सरसाना इंटरनेशनल एग्ज़िबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर का दूरदर्शी विज़न प्रस्तुत किया, जो बाद में साकार हुआ।
पावरलूम और सिंथेटिक टेक्सटाइल सेक्टर की मज़बूत आवाज़ माने जाने वाले भरत गांधी GST, इंपोर्ट ड्यूटी और ट्रेड पॉलिसी जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार से निरंतर संवाद में रहते थे। FIASWI के चेयरमैन तथा MANTRA और SASMIRA के डायरेक्टर के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर टेक्सटाइल सेक्टर के रिसर्च-आधारित विकास में अहम योगदान दिया।
समाज सेवा में भी वे समान रूप से समर्पित रहे। कई चैरिटेबल और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े रहकर उन्होंने विनम्रता और उदारता की मिसाल पेश की। एक करीबी सहयोगी के शब्दों में, “उन्होंने अपनी सफलता को सहजता से और अपनी जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाया।”
यात्रा और अध्ययन के शौकीन भरत गांधी की वैश्विक सोच ने सूरत जैसे स्थानीय औद्योगिक केंद्र को अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रदान किया। उनके निधन से सूरत टेक्सटाइल इंडस्ट्री के एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनके विचार, संस्थान और मूल्य आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन देते रहेंगे।
व्यवसाय की ऊंचाइयों पर पहुँचने के बावजूद भरतभाई अपनी विनम्रता के लिए जाने जाते थे। वे कई धर्मार्थ और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े रहे और पर्दे के पीछे रहकर अनगिनत लोगों की मदद की। उनके करीबियों के अनुसार, "वे सफलताओं को सहजता से और जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेते थे।
भरत गांधी का जाना केवल एक परिवार या एक कंपनी की क्षति नहीं है, बल्कि उस 'सूरत मॉडल' की क्षति है जिसे उन्होंने दशकों तक सींचा। उनके विचार और उनके द्वारा स्थापित संस्थाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मार्गदर्शक का काम करेंगी।
टेक्सटाइल जगत के विभिन्न संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और राजनीतिक हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने एक स्वर में कहा कि भरतभाई जैसा 'आम सहमति बनाने वाला' नेता अब मिलना मुश्किल है।
