सूरत : सरकारी ज़मीन पर अवैध झींगा तालाबों का साम्राज्य, दर्शन नायक ने एनजीटी के आदेशों की अनदेखी पर उठाए सवाल

कड़िया बेड और चोर्यासी क्षेत्र में हज़ारों हेक्टेयर ज़मीन पर कब्ज़ा; अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप, मशीनों को ज़ब्त करने की मांग

सूरत : सरकारी ज़मीन पर अवैध झींगा तालाबों का साम्राज्य, दर्शन नायक ने एनजीटी के आदेशों की अनदेखी पर उठाए सवाल

सूरत। सूरत जिले के तटीय इलाकों, विशेष रूप से ओलपाड, मजूरा, चोर्यासी और कड़िया बेड में सरकारी ज़मीन पर फल-फूल रहे अवैध झींगा तालाबों के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया गया है।

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव  दर्शन कुमार ए. नायक ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर प्रशासन की ढीली कार्रवाई और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  के आदेशों की अवहेलना पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दर्शन नायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि तापी नदी और समुद्र के संगम स्थल 'कड़िया बेड' जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हज़ारों हेक्टेयर सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जे हैं। यह कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन (CRZ) रूल्स 2019 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का खुला उल्लंघन है।

 सूचना का अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार, ओलपाड तालुका में लगभग 1343.9 हेक्टेयर और चोर्यासी-मजूरा क्षेत्र में 4,039 हेक्टेयर सरकारी ज़मीन पर अवैध झींगा तालाब बने हुए हैं।

एनजीटी (केस नंबर 16/2020) द्वारा बार-बार आदेश देने के बावजूद, स्थानीय प्रशासन केवल 'नाम मात्र' की कार्रवाई कर खानापूर्ति कर रहा है। 
शिकायत में प्रशासन के दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रहार किया गया है। पत्र में कहा गया है कि जहाँ एक तरफ गरीबों के घरों और धार्मिक ढांचों को तुरंत तोड़ दिया जाता है, वहीं कमर्शियल मुनाफे के लिए चल रहे इन अवैध तालाबों को अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।

अवैध तालाबों को तुरंत हटाकर कंक्रीट स्ट्रक्चर को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। डीजीवीसीएल द्वारा इन अवैध फार्मों को दिए गए बिजली कनेक्शन तुरंत काटे जाएं और जनरेटर/मशीनें ज़ब्त की जाएं।

एनजीटी के आदेशों का पालन न करने वाले ममलतदार, तलाटी और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

तालाब हटाने के बाद ममलतदार हर 15 दिन में साइट रिपोर्ट तैयार करें ताकि दोबारा कब्जा न हो सके।इस इलाके को टूरिस्ट डेस्टिनेशन और इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की योजनाओं को गति दी जाए।

कांग्रेस नेता ने इस पूरे मामले पर 30 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल ज़मीन का नहीं बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा और कानून के शासन का है। यदि प्रशासन अब भी विफल रहता है, तो यह आने वाले समय में एक बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

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