सूरत : अनेक बीमारियों से बचा सकती हैं छोटी-छोटी अच्छी आदतें : डॉ. आर. एन. वर्मा
जीवन आदर्श उत्कर्ष परिषद द्वारा आयोजित हेल्थ सेमिनार में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य जागरूकता पर जोर, गर्भावस्था से स्वस्थ जीवन की नींव पर विशेषज्ञों ने डाला प्रकाश
जीवन आदर्श उत्कर्ष परिषद की ओर से रविवार, 4 जनवरी 2026 को द्वारका हॉल, महाराज अग्रसेन भवन, सिटी लाइट, सूरत में 43वें हेल्थ सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार सुबह 10:30 बजे से दोपहर 11:45 बजे तक आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
परिषद के संस्थापक श्रीकांतजी मूंदड़ा ने बताया कि यह जनकल्याणकारी आयोजन परिषद की निरंतर स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम का हिस्सा है। सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. आर. एन. वर्मा (सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, मुंबई) ने आज के चुनौतीपूर्ण वातावरण में स्वास्थ्य के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल इच्छाशक्ति ही नहीं, बल्कि तर्क, प्रमाण और वैज्ञानिक सलाह के आधार पर लिए गए निर्णय ही व्यक्ति और समाज को स्वस्थ बना सकते हैं।
डॉ. वर्मा ने अपने व्याख्यान में बताया कि व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य गर्भावस्था के समय से ही आकार लेने लगता है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि गर्भस्थ शिशु का विकास पूरी तरह माँ के पोषण, स्वास्थ्य और जीवनशैली पर निर्भर करता है। उन्होंने गर्भावस्था में संतुलित आहार के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इससे शिशु के मस्तिष्क, हड्डियों और अंगों का समुचित विकास होता है तथा भविष्य में उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और बुद्धि सुदृढ़ होती है।

उन्होंने गर्भावस्था के दौरान आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, विटामिन, खनिज और पर्याप्त पानी के सेवन पर जोर दिया। साथ ही जंक फूड, अत्यधिक तला-भुना भोजन, नशीले पदार्थ, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयों का सेवन, तनाव और अनियमित दिनचर्या से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ माँ से ही स्वस्थ शिशु का जन्म होता है और गर्भकाल की देखभाल बच्चे के पूरे जीवन के स्वास्थ्य की नींव रखती है।
डॉ. वर्मा ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को संतुलित एवं पारंपरिक भारतीय आहार अपनाना चाहिए, जिसमें फल, सब्जियाँ, दालें, साबुत अनाज, दूध, दही और मेवे शामिल हों। जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखना तथा तनाव कम करना आवश्यक है। उनका कहना था कि रोकथाम इलाज से बेहतर है और छोटी-छोटी अच्छी आदतें अनेक बीमारियों से बचा सकती हैं।
इस अवसर पर डॉ. जी. एस. सोनी ने भी स्वस्थ दिनचर्या पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय जीवनशैली केवल जीवन जीने का तरीका नहीं, बल्कि स्वस्थ रहने की कला है। यदि आधुनिक जीवन में भी भारतीय स्वस्थ दिनचर्या को अपनाया जाए, तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है और जीवन को संतुलित बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीकांत मूंदड़ा, बिनय अग्रवाल, मनमोहन मूंदड़ा, अतुल बागड़, श्याम चांडक सहित परिषद की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सेमिनार में उपस्थित प्रतिभागियों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी।
