सूरत : बजट और जियोपॉलिटिकल हालातों का MMF टेक्सटाइल पर असर; विशेषज्ञों ने बताया 'नेशनल फाइबर स्कीम' को गेम-चेंजर
टेक्सटाइल एसोसिएशन के सेमिनार में सूरत के उद्योगपतियों का जमावड़ा; रॉ मटेरियल पर कस्टम ड्यूटी में बदलाव से कम होगी लागत
सूरत। 'द टेक्सटाइल एसोसिएशन (इंडिया)' की साउथ गुजरात यूनिट द्वारा अडाजन में एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का मुख्य विषय "MMF टेक्सटाइल पर बजट और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट का असर" था। सूरत पीपुल्स बैंक के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के दिग्गजों ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर मंथन किया।
यूनियन बजट 2026: सूरत के लिए वरदान
सेमिनार के मुख्य वक्ता और चैंबर ऑफ कॉमर्स के ऑनरेरी ट्रेजरर CA मितिश मोदी ने बजट के प्रावधानों का बारीकी से विश्लेषण किया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
नेशनल फाइबर स्कीम: उन्होंने बताया कि इस स्कीम में मैन-मेड फाइबर (MMF) को शामिल करना सूरत के लिए सबसे बड़ी जीत है। इससे स्थानीय हब को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
कस्टम ड्यूटी में सुधार: कच्चे माल पर सीमा शुल्क में बदलाव से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ छोटे और मंझोले टेक्सटाइल प्रोसेसर्स को मिलेगा।
रोजगार पर फोकस: खेती के बाद कपड़ा उद्योग सबसे बड़ा नियोक्ता है। बजट में लेबर-इंटेंसिव सेक्टर के लिए घोषित 'इंटीग्रेटेड प्रोग्राम' से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वैश्विक व्यापार और भारत की प्रतिस्पर्धा
दूसरे सत्र में TMMA(I) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री सचिन कुमार अरोड़ा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर चर्चा की:
FTA की अहमियत: यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक संबंध भारत को चीन और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में खड़ा करेंगे।
जियोपॉलिटिकल असर: वैश्विक तनाव के बीच भारत की सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स एक महत्वपूर्ण हथियार साबित होंगे।
निष्कर्ष: सेमिनार में यह स्पष्ट हुआ कि टैक्स रिफॉर्म्स और अनुकूल ट्रेड एग्रीमेंट्स के जरिए सूरत का टेक्सटाइल सेक्टर न केवल देश में, बल्कि दुनिया भर में अपनी कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ा सकता है।
