सूरत : भगवान भोग के नहीं, बल्कि प्रेम के भूखे होते हैं : संदीप महाराज
महाराज ने विदुर चरित्र, सती कथा और ध्रुव प्रसंग के माध्यम से अहंकार त्यागने की दी सीख
श्री राधे मित्र मंडल, देलाडवा गांव (डिडोली, सूरत) द्वारा साउथ इंडियन स्कूल के सामने आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार, 16 दिसंबर को कथा व्यासपीठ से संदीप महाराज ने भावपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और त्याग का संदेश दिया। श्रीमद्भागवत कथा के मुख्य यजमान अंजनी पांडेय हैं।
कथा के दौरान संदीप महाराज ने विदुर चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विदुर के घर प्रेमपूर्वक भोजन करने पहुंचे थे, जहां विदुरानी ने प्रेम में केले के छिलकों का भोग भी अर्पित कर दिया, जिसे भगवान ने सहर्ष स्वीकार किया। इसके विपरीत भगवान ने दुर्योधन के घर छप्पन प्रकार के व्यंजनों का त्याग किया। महाराज ने कहा कि भगवान भोग के नहीं, बल्कि प्रेम के भूखे होते हैं।
इसके पश्चात सती चरित्र का वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान करते हुए यज्ञ का आयोजन किया और शिव को आमंत्रित नहीं किया। सती बिना बुलाए यज्ञ में पहुंचीं, जहां शिव का स्थान न देख दुखी होकर यज्ञ कुंड में स्वयं को अग्नि को समर्पित कर दिया। यह सुनकर भगवान शिव ने अपने जटाजूट से वीरभद्र को उत्पन्न कर यज्ञ विध्वंस की आज्ञा दी। वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया। बाद में भगवान विष्णु के आगमन से शिव का क्रोध शांत हुआ। इस प्रसंग से महाराज ने अहंकार त्यागने की शिक्षा दी।
कथा में ध्रुव चरित्र का भी वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि मात्र छह माह की कठोर तपस्या से भगवान को प्राप्त करने वाले ध्रुव भगवान के सबसे छोटे और अटल भक्त थे। भगवान के दर्शन होते ही ध्रुव की राज्य की कामना समाप्त हो गई। 36 हजार वर्षों तक राज्य करने के पश्चात वे उत्तर दिशा में ध्रुव तारे के रूप में स्थित हुए। महाराज ने बताया कि बुधवार को कथा में वामन अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा।
आयोजन में जयराम यादव, संतोष तिवारी, मनोज तिवारी, नागजी भाई, किशोर भाई, बबलू शुक्ला, राजेश विश्वकर्मा, सुरेश विश्वकर्मा, अभिषेक सिंह, शेषलाल पांडे, के. पी. मिश्रा, शिवकुमार उपाध्याय सहित सभी कार्यकर्ता, सदस्यगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे, जिन्होंने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
