वडोदरा में कलारी मार्शल आर्ट की निशुल्क शिक्षा, महिला सशक्तिकरण की ओर एक कदम

वडोदरा में कलारी मार्शल आर्ट की निशुल्क शिक्षा, महिला सशक्तिकरण की ओर एक कदम

भारत की प्राचीनतम आत्मरक्षा कला ‘कलारीपयट्टू’ के माध्यम से किशोरभाई चुडासमा और उनकी पुत्रवधू हरदीपबेन महिलाओं को बना रहे हैं आत्मनिर्भर और निडर

वडोदरा में महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से भारत की प्राचीनतम मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू की मुफ्त ट्रेनिंग दी जा रही है। यह अनूठा प्रयास मुंबई निवासी मार्शल आर्ट विशेषज्ञ किशोरभाई चुडासमा और उनकी पुत्रवधू हरदीपबेन चुडासमा द्वारा किया जा रहा है।

केरल की इस पारंपरिक और ऐतिहासिक मार्शल आर्ट को दुनिया की सबसे पुरानी आत्मरक्षा पद्धति माना जाता है, जिसे आज भी "सभी मार्शल आर्ट की जननी" के रूप में जाना जाता है। किशोरभाई ने वर्षों से मुंबई में इस कला की शिक्षा दी है और अब वडोदरा में भी यह प्रशिक्षण शुरू किया है।

हाल ही में उन्होंने वडोदरा में तीन दिवसीय कलारी मार्शल आर्ट शिविर का आयोजन किया, जिसमें महिलाओं और युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जल्द ही यहां एक स्थायी कक्षा भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।

किशोरभाई का मानना है कि, "यह कला न सिर्फ शरीर को मज़बूत बनाती है, बल्कि मनोबल, आत्मविश्वास और साहस को भी बढ़ाती है।" वे कहते हैं कि इस प्रशिक्षण से महिलाएं किसी भी विपरीत परिस्थिति में आत्मरक्षा कर सकती हैं और समाज में भयमुक्त होकर जी सकती हैं।

उनकी बहू हरदीपबेन चुडासमा, जिन्होंने स्वयं एक वर्ष में यह कला सीखी, अब अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं। वे बताती हैं, "कलारी आत्मरक्षा की एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली प्रणाली है। इसके अभ्यास से मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ा है और मैं हर महिला को इसे सीखने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ।"

कलारीपयट्टू का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। यह सिर्फ एक मार्शल आर्ट नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन की संपूर्ण विद्या है। इसमें हथियारों के प्रयोग, मर्म चिकित्सा (नाड़ी बिंदुओं पर वार), शारीरिक लचीलापन, अनुशासन और आंतरिक शक्ति के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को आज के दौर में पुनर्जीवित कर किशोरभाई और हरदीपबेन जैसे प्रशिक्षक समाज को एक नया संदेश दे रहे हैं,  कि आत्मरक्षा हर महिला का अधिकार है, और इसे सीखकर वह निडर, सशक्त और स्वावलंबी बन सकती है।

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