वडोदरा : राहुल गांधी ने फिर बखेड़ा खड़ा कर दिया, सूत की माला सीढ़ी की रैलिंग पर लटका चलते बने!

पदाधिकारियों-कार्यकताओं के साथ हॉल से आते हुए राहुल गांधी की फाइल तस्वीर

सत्ता के लिए गांधीजी का उपनाम रखने वाले बापू का पसंदीदा सूत की माला न पहनकर अपमान किया : गुजरात भाजपा प्रवक्ता

गोडसे की भक्ति करने वाले हमें बापू के बारे में सुझाव न दें :  नगर कांग्रेस अध्यक्ष
रा’य में होने वाली गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में दाहोद में मौजूद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी विवादों में घिर गए हैं। दीनदयाल सभागार में नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद राहुल गांधी वीआईपी गेट की सीढिय़ों से नीचे उतरे थे।  इस बार उनके बाएं हाथ में एक सूत की माला देखने को मिली थी। नीचे उतरते समय उन्होंने सूत की माला दाहिने हाथ में ले लिया। जहां उन्होंने हाथ में लिये सूत की माला को नीचे सरका दिया और नमस्कार कर और अपनी कार में बैठ गए। देखते ही देखते इस घटना का वीडियो भी वायरल हो गया। दाहोद शहर के कॉलेज मैदान में सभा पूर्ण करने के पश्चात राहुल गांधी ने विधायकों और नेताओं के साथ बैठक का आयोजन किया गया था।  स्वामी विवेकानंद परिसर स्थित हॉल में विधायकों की बैठक के बाद पंडित दीनदयाल सभागार में नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की गई। जहां से नीचे उतरते समय सूत की माला पाइप पर अटका देने से वे विवाद में आ गये हैं। 
राहुल गांधी वडोदरा हवाई अड्डे पर कांग्रेस पदाधिकारियों से मिले, जहां शहर के कांग्रेस अध्यक्ष ऋत्विज जोशी ने उन्हें सूत की माला पहनाने की कोशिश की। दो-दो बार माला पहनाने की कोशिशों के बाद भी राहुल गांधी ने सूत की माला नहीं पहनी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व महापौर भरत डांगर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा है कि जिस परिवार ने महात्मा गांधी का उपनाम लेकर सालों से देश पर राज किया है, उसे पू’य बापू का पसंदीदा सूत की माला पहनने में तकलीफ हो रही है? यह भी गुजरात में? राहुल गांधी के रेलिंग पर सूत की माला छोड़ते हुए वीडियो पर लिखते हुए भरत डांगर ने कहा कि सत्ता के लिए गांधीजी का उपनाम रखने वालों ने बापू का पसंदीदा सूत की माला पहने तो नहीं, बल्कि उसे सीढिय़ों पर फेंककर उनका अपमान किया है। सत्ता लोभी कांग्रेस माफी मांगे। 
इस संबंध में दाहोद शहर कांग्रेस अध्यक्ष ऋत्विज जोशी ने कहा कि दाहोद में सत्याग्रह रैली में जिस तरह आदिवासी व अन्य समुदाय के लोग शामिल हुए और जो सफलता मिली वह भाजपा के लोग नहीं देख पा रहे है।  जिन लोगों ने ट्वीट किया है, वडोदरा बीजेपी में उन्हे कोई नहीं पूछता, उनका कोई पद नहीं है। सस्ते प्रचार के लिए ही बयान दिया है। गोडसे की पूजा करने वाले हमें बापू के बारे में निर्देश न दें।

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