वडोदराः कोरोना को रोकने में उपयोगी है पुराना इलाज, जानें

बेइन सर्किट

अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होने पर रोगी को बायपेप के दौरान विकल्प के रुप में बेइन सर्किट होता है उपयोगी

सयाजी और समरस अस्पताल में, इस तकनीक को पिछले 20-25 दिनों से 250 से 300 रोगियों पर वेंटिलेटर के विकल्प के रूप में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है। कोरोना एक नई बीमारी है जिसमें फेफड़े में घातक प्रभाव के कारण सांस लेने और छोड़ने की प्राकृतिक प्रणाली बाधित होती है। इसलिए, इस बीमारी में, रोगी के जीवन रक्षा के लिए जरुरत के अनुसार नाक के माध्यम से एनआरबीएम द्वारा बायपैप और आक्रामक वेंटीलेटर द्वारा रोगी की स्थिति के अनुसार आवश्यक दबाव से ऑक्सीजन देना उपचार का एक अनिवार्य हिस्सा है।  वर्तमान में उच्च दबाव ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले रोगियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है और व्यापक प्रबंधन के बावजूद वेंटिलेटर की कमी है।
 इस परिस्थति में विशेष कर बायपेप एवं अंतिम उपाय जैसे इन्वेटीज वेन्टिलेटर के दौरान सरल सुविधाजनक एवं प्रभावकारी उपाय के रुप में बैन सर्किट के रूप में जाना जाने वाला एक पुराना एनेस्थेसिया डिलीवरी सिस्टम ऐसे संकटों के समय में बहुत उपयोगी साबित हो रहा है। 
 सयाजी अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. नेहा शाह, डॉ. ममता पटेल और डॉ. देवयानी देसाई ने कहा कि यह एनेस्थेसिया  विज्ञान की बहुत पुरानी तकनीक है। इस सिस्टम या तकनीक का उपयोग 1972 में बेइन नामक वैज्ञानिक चिकित्सक ने मरीजों  पर उच्च दबाव से ऑक्सीजन देने में इस सिस्टम एवं तकनिक की उपयोगिता का नया प्रयोग किया था। बाद में इसका उपयोग अधिक प्रचलित एवं व्यापक बन गया। सरल एवं बहुत कम खर्च वाले इस तकनिक से मरीज के फेफड़े जरुरी मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाने एवं कार्बन के सुरक्षित निकालने के लिए यह तकनिक वेन्टीलेटर न हो ऐसे छोटे अस्पतालों में एक विकल्प के रुप में उपयोगी माना जाता है। इस सिस्टम में उचित डाया मीटर श्वांस अंदर लेने के लिए इन्सीपरेटरी एवं  श्वांस छोड़ने के लिए एक श्वसन नली होती है। यह सिस्टम बहुत कम समय में फेफड़ों तक  पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचा सकते हैं और सभी उम्र के रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
सयाजी अस्पताल के कोरोना विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. बलीम ओबी ने कहा कि सयाजी और समरस अस्पताल में, एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में, बायपैप के विकल्प ने पर्याप्त दबाव के साथ साँस के सिंचन के लिए बैन सिस्टम का उपयोग करना शुरू कर दिया है।  अब तक 250 से 300 मरीजों पर इस्तेमाल किया गया है। अधिकतम 60 रोगियों में इस सिस्टम के उपयोग से वेंटिलेटर की आवश्यकता को टाला जा  सकता है। स्वाभाविक रूप से, इसने उन रोगियों को सुविधाएं प्रदान करना आसान बना दिया है जिन्हें वेंटिलेटर की अधिक से अधिक आवश्यकता है।
  जबकि कोरोना की दूसरी लहर अधिक घातक है और अभी तक ठीक नहीं हुई है, डॉक्टर और शोधकर्ता अन्य श्वसन बीमारियों और चिकित्सा उपकरणों के इलाज के लिए दवाओं का प्रभावी ढंग से और सफलतापूर्वक उपयोग करके जीवन बचा रहे हैं। यह पुरानी प्रणाली एक बहुत ही उपयोगी और आशीर्वाद रूप साबित हुई है। 

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