उपर टोपी : सालाना 50 हजार करोड़ का कारोबार... लेकिन मेइन : फैब्रिक सर्टिफिकेशन की कमी उद्योग के विकास के आड़े बड़ी बाधा

नए क्रिएटिव फैब्रिक के उत्पादन पर हो रहा असर, कॉमन फैसिलिटी सेन्टर के निर्माण के लिए प्रयास

सूरत : बीते छह दशकों में सूरत में टेक्सटाईल उद्योग का असीम विकास हुआ है। यहां 350 जितनी प्रोसेसिंग मिल, 6 लाख पावरलूम मशीन, एक लाख एम्ब्रोइडरी मशीन सहित पूरी वेल्यू एडिशन इंडस्ट्री विकसित हुई है। सूरत में टेक्सटाईल इंडस्ट्री का सालाना कारोबार अंदाजित 50 हजार करोड़ है, किन्तु यह विडंबना ही है कि यहां फैब्रिक सर्टिफिकेशन की सुविधा नहीं है। कहने को तो यहां 500 से अधिक फेब्रिक्स की क्वॉलिटी बनती है, किन्तु एक पूर्ण विकसीत फैब्रिक सर्टिफिकेशन सेन्टर नहीं है। यहां फेब्रिक्स में नया क्रिएशन करने वालों को उनके फेब्रिक्स के लिए चैन्नई में सीट्रा और दिल्ली में अटीरा जैसी संस्था में सर्टिफिकेशन(प्रमाणित) कराना पड़ता है। इसमें समय और खर्च दोनों व्यतित होता है। 
देशभर में उत्पादित फेब्रिक्स का अलग-अलग प्रकार से टेस्टिंग करके अग्नि प्रतिरोध, इलेक्ट्रिसिटी, जैविक प्रतिरोध के टेस्टिंग के बाद उसको प्रमाणित किया जाता है। स्थानीय उद्यमी फैब्रिक सर्टिफिकेशन सेन्टर के अभाव के कारण अपनी क्षमता का भी पूरा उपयोग नहीं कर पाते। फैब्रिक सेन्टर प्रयोगशाला में एक प्रकार की ढांचागत सुविधा होती है जो फेब्रिक्स का परीक्षण कर सकती है और इसे एक विशिष्ट प्रमाणपत्र जारी कर सकती है। हाल में सूरत में अधिकतर पॉलिएस्टर फैब्रिक का उत्पादन किया जा रहा है। सूरत के कपड़ा उत्पादकों के पास पॉलिएस्टर के अलावा अन्य गुणवत्ता के कपड़े बनाने की क्षमता है, लेकिन उत्पादित फेब्रिक्स का परीक्षण करके, सर्टिफिकेट प्राप्त होने तक इसका व्यावसायिक उपयोग करना संभव नहीं है। जानकारों का कहना है कि अटीरा और सीट्रा में फैब्रिक टेस्टिंग पर होने वाला खर्च और समय इतना बर्बाद होता है कि उत्पादक त्रस्त हो जातै है और यही वजह है कि कई बार नया फैब्रिक बनाने के लिए उद्यमी दिलचस्पी नहीं लेता। 
सूरत में टेक्सटाईल उद्योग के विकास के लिए एक कॉमन फैसिलिटी सेन्टर के निर्माण के लिए चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने प्रयास तेज किए है। इसके लिए एक डिटेइल रिपोर्ट तैयार की गई है। इस सेन्टर में कई सुविधाए उपलब्ध होगी, जिसमें टेक्सटाईल इंडस्ट्री के प्रोजेक्ट के विकास के लिए जानकारी प्राप्त होगी। सरकार से 25 करोड़ का अनुदान प्राप्त करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इस कॉमन फैसिलिटी सेन्टर पर सूरत में हाल में उत्पादित और भविष्य में निर्मित होने वाले फेब्रिक्स का परीक्षण हो सकेगा और आधिकारिक तौर पर आवश्यक विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र प्राप्त करने में सक्षम होगा। 

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