स्मशान घाट पर आने वालों को संक्रमण ना लगे इसलिए चार महिलाओं का अनुठा काम

स्मशान घाट पर साफ सफाइ के अलावा लोगों से गाइडलाइन पालन का करती हैं अपील

सूरत शहर में कोरोना बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिसके चलते रोज कई मरीजों की मौत हो जा रही है। स्मशान घाट पर दाह के लिए भट्ठियां लगातार जल रही है। इसके बावजूद वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में स्मशान घाट पर आने वाले मृतक के परिवारजनों को कोरोना वायरस के बचाने के लिए कई महिला कोरोना वायरस सफाई कार्य में लगातार जुड़ी हुई है। यह महिलाएं लोगों को कोरोना की गाइडलाइन पालन करने और सुरक्षित रहने के लिए सलाह सूचना देती हैं।
कोरोना की महामारी में सूरत में स्मशान घाट 24 घंटे चल रहे हैं। सामान्य तौर से हिंदू परंपरा के अनुसार  सूर्यास्त के बाद अग्नि संस्कार नहीं किया जाता, लेकिन कोरोना महामारी के कारण रात को भी स्मशान घाट चल रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के आने जाने के कारण भय ज्यादा रहता है। जहांगीरपुरा कुरुक्षेत्र मैं प्रतिदिन 100 से अधिक दाहविधि की जा रही है। यहां संक्रमण फैलने की संभावना ज्यादा है, लेकिन 4 महिला दिन रात यहां पर साफ सफाई में जुटी हैं। 
अनीता डी पवार, अनीता जे पवार, संगीता पाटिल और मंगला पवार ने बताया कि जब कोरोनावायरस शुरू हुआ तब डर लगता था। लेकिन ट्रस्टियों ने और कर्मचारियों ने जानकारी देने के बाद यह भय दूर हुआ है। अभी हम साफ सफाई नहीं करेंगे तो कोरोना संक्रमण फैलने का भय है। हम दिन में दो बार कपड़े बदलते हैं और साफ साफ सफाई का पूरा इंतजाम करते हैं। स्मशान गृह में यह महिला वोरियर्स थोड़ी-थोड़ी देर के बाद पोछा भी मारती हैं। ट्रस्टी कमलेश टेलर ने बताया कि पहले दिन में दो से तीन बार सफाई होती थी, लेकिन अब स्मशान घाट को सैनिटाइज भी किया जाता है जिसके चलते संक्रमण का भय काफी काफी कम हो गया है। 

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