गुजरात की यह महिला करती है खतरनाक कोब्रा साँपो का रेसक्यू, छोटी सी उम्र से की थी शुरुआत

(Photo Credit : divyabhaskar.co.in)

फॉरेस्ट ऑफिसर दादा के साथ पड़ा था प्रकृति के साथ घुलने-मिलने का शोख, अब तक बचा चुकी है 50 से अधिक साँपो को

सांप का नाम सुनकर ही अधिकतर लोगों के प्राण सुख जाते है। आए दिन रिहायशी इलाकों में सांप के देखे जाने की घटना सुनाई देती है। ऐसे में नेचर क़ल्ब और अन्य सामाजिक संस्था से जुड़े लोग साँपो को रेसक्यू करने के लिए आगे आते है। नेचर क़ल्ब की ऐसी ही एक सदस्य हीना के बारे में आज हम बात करने जा रहे है। राजकोट की हीना चावडा, जो की मात्र 16 साल की उम्र से ही सांप को रेसक्यू करना शुरू कर दिया था। हिना ने अब तक 50 से अधिक नागों को पकड़ा है, जान को जोखिम में डाल कर भी हीना ने कोब्रा और स्नाइपर साँपो को पकड़ा है। 
कोब्रा, रोल और स्नाइपर जैसे जहरीले साँपो को सुनते ही लोग डर से काँपने लगते है। वही दूसरी और हीना चावडा खतरनाक साँपो को खेलते-खेलते उन्हें रेसक्यू कर लेती है। राजकोट की सोरठियावाडी सर्कल के पास रहने वाली हीना चावडा आंबेडकर यूनिवर्सिटी में बीए का अभ्यास करने के साथ वाहन साँपो को रेसक्यू भी करती है। हीना के कहे अनुसार, साप और अन्य वन्यजीव प्रकृति के साथ जुड़े हुये है और यदि उन्हें छेड़ा ना जाये तो वह उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाते है। जैसे हर जीव को अपनी जान प्यारी होती है, सांप को भी अपनी जान प्यारी होती है। मनुष्यों के बीच आने पर वह भी डर जाता है और यहाँ-वहाँ दौड़ने लगता है।  
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हीना कहती है कि उन्हें बचपन से ही नेचर के साथ घुलने मिलने का शोख था। उनके दादा हरसूखभाई चावडा फॉरेस्ट ऑफिसर थे, इसलिए पर्यावरण बचाना, जंगल के प्राणियों को बचाना ही उसका स्वप्न रहा है। जब वह छट्ठी कक्षा में पढ़ती थी, तब उसने पहली बार सांप को स्पर्श किया था। तब से ही उसके मन में वन्यप्राणियों के लिए कुछ करने की चाह थी। जिसके बाद वह एनजीओ के साथ जुड़ी थी। वह नेचर हेल्थ फ़ाउंडेशन द्वारा छात्रों के जुओलोजिकल कैंप आयोजित किया था और वहाँ उन्होंने सांप को रेसक्यू करने की तालिम ली थी।  
हीना ने कहा की राजकोट के आसपास के खेतों में जब साप निकलता है तो लोग उन्हें संपर्क करते है। साल 2016 में उन्होंने पहलीबार अजगर को रेसक्यू किया था। हीना को उसके सर का फोन आया था, जहां पर उसके सर ने बताया कि नजदीक के कुएं में से एक साढ़े चार फिट का अजगर निकला था और उन्होंने उसका रेसक्यू किया था। जिसके बाद से हर साल बारिश की सीजन में उन्हें रेसक्यू के लिए फोन आए है, जहां वह अपने पापा और चाचा के साथ जाकर सांप का रेसक्यू किया था। 
हीना ने कहा कि गुजरात में साप की जो प्रजातियाँ चार ही साप जहरीले होते है, बाकी के सभी सांप जहरीले नहीं होते। अधिकतर समय सांप खाना ढूंढते हुये रिहायशी इलाकों में घुस आता है। साँपो को चूहे सबसे अधिक प्रिय होते है, इसलिए जहां चूहे होते है वहाँ सांप का देखा देना आम है। ठंडी के चार महीनों के दौरान साप समाधि अवस्था में चला जाता है। छोटी उम्र से हीना ने अब तक कई साँपो को रेसक्यू किया है। न्हिना का मानना है कि किसी भी वन्यजीवों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। वह भी हमारे मित्र ही है। 

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