कैंसर और कोरोना दोनों को हराया इस युवती ने, अब लोगों की करेगी सेवा

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बीमारी के इलाज के लिए विभिन्न एनजीओ द्वारा मिली थी लाखों की सहायता, समाज के प्रति अपना ऋण अदा करने के लिए किया समाजसेवक बनने का फैसला

कोरोना महामारी के दौरान कई लोगों ने अपने स्वजन गँवाए है। कई लोगों ने महामारी के कहर के सामने अपने घुटने टैक दिये। ऐसे में आज हम एक ऐसी युवती की बात करने जा रहे है, जिसने कैंसर और कोरोना दोनों को हराकर अपनी ज़िंदगी की जंग जीत ली। गंभीर बीमारियों से जीतने के बाद युवती ने अपना बाकी का जीवन समाज के प्रति समर्पित कर दिया है। नूपुर नाम की इस युवती ने अपनी 12वीं की परीक्षा देने के बाद कैंसर का इलाज करवाय था। जिसके बाद कोरोना के सामने भी उन्होंने डॉक्टरों की सहायता से विजय हासिल की। 
विस्तृत जानकारी के अनुसार, वडोदरा के गोरवा इलाके में रहने वाली युवती ने पिछले साल 12 साइन्स की परीक्षा दी थी। जिसके बाद उसे कैंसर होने की बात सामने आई थी। कैंसर का इलाज करवाने के लिए नूपुर अस्पताल में भर्ती रही थी। इसी दौरान नवंबर में नूपुर कोरोना संक्रमित हो गई थी। जिसके चलते उन्हें घर पर ही क्वारंटाइन कर दिया गया था। 15 दिनों के बाद नूपुर ने कोरोना पर भी विजय हासिल की थी। कोरोना और कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों पर विजय हासिल करने वाले अब समाज की और से मिले उसे सहकार का ऋण उतारने के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता बनना चाहती है। जिसके लिए उसने वुमन एम्पावरर्मेंट और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिशद के साथ समाज सेवा की इसके अलावा वह फोरेंसिक डॉक्टर बनने की दिशा में आगे पढ़ाई कर रही है। 
नूपुर का इलाज करने वाले जिगर पटेल कहते है की नूपुर को जो बीमारी हुई थी उसका नाम ग्रे जॉन लिंफोमा है। यह बीमारी कैंसर के हजार मरीज में से 1 मरीज को होती है। यह बीमारी रक्तकण और श्वेतकण के बीच में होने वाले कैंसर का एक प्रकार है। जो आम तौर पर 16 से 26 साल के युवाओं में देखने मिलती है। नूपुर की माता कहती है की बेटी के इलाज के लिए समाज और शिक्षकों द्वारा काफी हिम्मत मिली थी। कई एनजीओ द्वारा नूपुर के इलाज के लिए लाखों रुपए उनके अकाउंट में आए थे। हालांकि इसमें से उन्होंने मात्र नूपुर के इलाज जीतने पैसे ही इस्तेमाल किए। 

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