गुजरात सरकार की ये इकाई मुनाफा करने लग गई, जानें कौन सा आइडिया काम कर गया!

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी

सरकारी ऑफिसों के लिए खरीदे जाने वाले फर्नीचरों को वन विकास निगम से ही खरीदने के निर्णय ने दिया फायदा

सरकारी इकाइयों का घाटा करना हम सभी के लिए आम बात हो गई है। हालांकि यदि कोई सरकारी विभाग फायदा करने लगे तो हमें आश्चर्य जरूर होगा। गुजरात का वन विकास निगम भी अब उन इकाइयों में शामिल हो गया है, जो फायदा कर रहे है। वन विकास निगम के कुछ अधिकारियों ने बताया कि निगम ने 2019 और 20 के साल में तीन करोड़ 40 लाख का मुनाफा किया था और आने वाले साल के लिए अब अंदाज लगाया जा रहा है कि मुनाफा 4 करोड़ 11 लाख के पार हो जाएगा।
वन विकास निगम के अनुसार मुनाफा बढ़ने का एक कारण हो सकता है कि सरकार द्वारा सरकारी कचहरी में फर्नीचर या अन्य चीजों की खरीदी करना हो तो वन विकास निगम में से करनी रहेगी। अधिकारी के अनुसार वन विकास निगम में फर्नीचर तथा अन्य सामग्री आदिवासी समाज के कारीगर बना रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी भी बनी हुई है। यह निगम सालों पहले काफी खोट करता था। क्योंकि उसके द्वारा उत्पादित चीजों की बिक्री में काफी तकलीफ आती थी, पर अब खुद सरकारी ऑफिस ही चीजें खरीदते हैं जिससे बिक्री बढ़ रही है।
इसके अलावा अन्य वन्य पैदाश भी ग्राम पंचायत द्वारा वन अधिकार कानून तथा अन्य नियमों के अनुसार बेचा जा रहा है। यह निगम विविध योजनाओं के अंतर्गत एवं आयुर्वेदिक औषधियों का विनिर्माण कर रहा है। इसके अलावा सरकारी दफ्तरों में इंटीरियर, फर्नीचर और अन्य चीज वस्तु भी बेची जा रही है। वनवासी एवं समाज के पिछड़े वर्गों को शोषण मुक्त करने के लिए तथा अन्य प्रदेशों में से व्यापार में से निजी करण दूर करना यही निगम का मुख्य उद्देश्य है। निगम के साथ फिलहाल नव सखी मंडली तथा 25 सहभागी वन व्यवस्था मंडल कार्यरत है। निगम पहले ही अपने 16 एकत्रीकरण केंद्रों को भी शुरू कर चुका है। 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें