कर्फ़्यू में मरीज के लिए खून लेने निकले परिजन को पुलिस ने पकड़े रखा, मरीज की हुई मौत

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo: Bidesh Manna/IANS)

डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन भी दिखाया तो भी नहीं मानी पुलिस

सूरत में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अस्पताल में भर्ती अधिकतर मरीजों की स्थिति काफी खराब है। मरीजों को लगातार ऑक्सीज़न की कमी पड़ रही है। जिसके कारण तंत्र द्वारा ऐसे मरीजों के लिए ऑक्सीज़न और अन्य साधन ले जाने के लिए उनके परिजनों को रात्रि कर्फ़्यू में आने जाने की छुट दी गई है। हालांकि सूरत के उन इलाके में अस्पताल में भर्ती एक मरीज के लिए खून लेने निकले एक परिजन को पुलिस रात्रि कर्फ़्यू के भंग के बदलाए में पकड़ लिया। जिसके कारण समय पर खून ना मिल पाने के कारण मरीज की मौत हो गई। 
विस्तृत जानकारी के अनुसार, उन के किम चोकड़ी इलाके में मुसलमान समाज के अग्रणी और भाटकॉल गाँव के रहने वाले नजीर महम्मदभाई मलेक कोरोना संक्रमित हुये थे। जिसके चलते 19 अप्रैल को उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। 25 अप्रैल को नजीर भाई के शरीर में खून की कमी होने लगी, जिसके चलते डॉक्टर ने तुरंत ही उन्हें प्रिस्क्रिप्शन लिखकर इमर्जंसी में दो बोटल खून की व्यवस्था करने को कहा। जिसके चलते नजीर भाई के भाई के जमाई सामाजिक कार्यकर्ता जाफ़र देशमुख को लेकर खून का इंतजाम करने निकल पड़े।

अस्पताल से निकलते ही कुछ दूर सिविल ड्रेस में खड़ी सचिन जीआईडीसी पुलिस ने बाइक पर जा रहे दोनों परिजनों को रोका था। जिस पर दोनों ने कोरोना पेशंट के लिए खून लेने जा रहे है, ऐसा बताते हुये उन्हें जल्दी जाने देने के लिए कहा। हालांकि पुलिस ने दोनों को जाने नहीं दिया, जिसके चलते दोनों में बहस हो गई। इस बहस में खून के लिए लिखा प्रिस्क्रिप्शन भी फट गया था। इसके बाद पुलिस ने दोनों को मुक्त तो कर दिया, पर इन सभी में काफी समय बिगड़ा। जिसके चलते मरीज की मौत हो गई थी। जिसके चलते मृतक के जमाई ने शिकायत दर्ज करवाई है। 
पुलिस की दादागिरी का यह पूरा वीडियो सीसीटीवी में कैद हो गई थी। आसपास की बिल्डिंग में और आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों ने घटना का वीडियो अपने फोन में उतार लिया था। इस दौरान किस तरह दोनों युवक पुलिस के सामने गिड़गिड़ा रहे थे, यह देखकर लोगों में काफी आक्रोश है। 

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