बढ़ सकती है RTE फॉर्म भरने की तारीख, शिक्षामंत्री ने दिया महत्वपूर्ण बयान

कोरोना के कारण दो सालों से कक्षा 1 में एडमिशन नहीं होने के कारण घटी है आरटीई की सीट

अहमदाबाद में नगर प्राथमिक शिक्षण समिति द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी मौजूद रहे राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेन्द्र सिंह चूड़ासमा ने आरटीई एक्ट के तहत प्रवेश को लेकर एक महत्वपूर्ण निवेदन दिया है। शिक्षामंत्री ने कहा, RTE के तहत एक भी छात्र प्रवेश से वंचित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन फॉर्म भरने की सीमा में भी इजाफा किया जाएगा। जिससे की अधिक से अधिक बच्चों को आरटीई एक्ट के तहत प्रवेश मिल सके। इसके अलावा सरकार द्वारा फीस के बारे में भी जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। 
उल्लेखनीय है की फिलहाल कक्षा 1 में आरटीई एक्ट के तहत प्रवेश प्रक्रिया चल रही है।
फिलहाल राज्य की 846 निजी स्कूलों में एक भी आरटीई के तहत होने वाली सीट की संख्या शून्य हो गई है। जिसके चलते इस साल 20 हजार से अधिक सीट कम हो चुकी है। पिछले साल भी इस तरह 14 हजार सीट कम हुई थी। इस तरह से दो सालों में 34 हजार सीट कम हुई है, जिसके चलते अभिभावकों को काफी नुकसान हुआ है। आरटीई के तहत प्रवेश ना मिलने से मजबूरन अभिभावकों को निजी स्कूल में ज्यादा फीस देकर प्रवेश लेना पड़ता है। 
आरटीई एक्ट के तहत कक्षा 1 में निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बैठक पर गरीब बालकों के छात्रों को मुफ्त में प्रवेश दिया जाता है। जिसके बाद 14 साल तक बच्चों को सरकार द्वारा मुफ्त में शिक्षा दी जाती है। साल 2012 में गुजरात सरकार द्वारा आरटीई प्रक्रिया का आरंभ किया गया था। साल 2019 में आरटीई में कक्षा 1 के तहत 1.08 लाख बैठक उपलब्ध हुई थी। हालांकि पिछले साल अधिकतर स्कूलों में पिछले साल अधिक प्रवेश नहीं हुआ, जिसके कारण पिछले साल के प्रवेश के अनुसार यदि 25 प्रतिशत के हिसाब से आरटीई के तहत सीट उपलब्ध किए जाते है। 
इस नियम के अनुसार, पिछले साल गुजरात की 846 स्कूलों में सीट की संख्या शून्य हो चुकी है। क्योंकि पिछले साल 846 स्कूलों में कक्षा 1 में एक भी प्रवेश नहीं हुआ था। हालांकि इस बारे में कहा जा रहा है कि अधिकतर स्कूलों ने अंतिम समय तक सारी जानकारी नहीं दी थी। जिसके चलते सरकार ने सभी डीईओ को आदेश देकर सभी जानकारी जल्द से जल्द मँगवाई थी। हालांकि इस साल तो राज्य की इन 846 स्कूलों में कोई भी आरटीई सीट नहीं रहेगी। इन 846 स्कूलों के अलावा माइनोरिटी स्कूलों को आरटीई के नियम में से बाहर रखे जाने के कारण अब मात्र 74 हजार बैठक ही उपलब्ध है। 
उल्लेखनीय है कि पिछले दो तीन सालों से हर साल आरटीई के लिए एक लाख से अधिक एप्लिकेशन आ रहे है। ऐसे में दो सालों में 34 हजार सीट कम होने के कारण गरीब अभिभावकों को काफी नुकसान हो सकता है। इन सभी स्कूलों में सबसे अधिक अहमदाबाद शहर में 57 स्कूल है, जबकि ग्राम्य इलाकों में तीन स्कूल है। इस तरह कुल 60 स्कूल आरटीई में से बाहर हो चुकी है। 

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