सूरत कपड़ा कारोबारी-श्रमिक टेस्टिंग-वैक्सीन के फेर में फंसे, धंधा हुआ मंदा

प्रतिकात्मक तस्वीर

आम दिनों में रोज़ाना 400 ट्रक माल सूरत से रवाना होता था, अब आंकड़ा सिर्फ 80 पर पहुंचा

कोरोना के विकट होती परिस्थिति के कारण कपड़ा बाजार में टेस्टिंग के बाद ही प्रवेश करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रमिक कभी भी कपड़ा मार्केट में नहीं जा पा रहे हैं। इसका सीधा असर कपड़ों के पार्सल डिलीवरी पर पड़ा है। होली के बाद से कपड़ा पार्सलों की डिलीवरी में 80% की कमी आई है।
5 अप्रैल से शहर के कपड़ा हीरा बाजार और औद्योगिक इकाइयों तथा मॉल और शॉपिंग कंपलेक्स में जाने वालों के लिए कोरोनावायरस और वैक्सीनेशन अनिवार्य कर दिया गया है। कपड़ा मार्केट क्षेत्र में मनपा ने कई स्थानों पर टेस्टिंग बूथ लगा दिया है जहां कि श्रमिकों की जांच की जा रही है लेकिन यह बहुत कम होने के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक अभी भी अपनी जांच नहीं करवा पाए हैं। यहां पर दिन में 1000 कारीगरों का ही टेस्ट हो सकता है जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रमिक मार्केट में नहीं जा पा रहे हैं। इसके कारण पार्सल की डिलीवरी 80% कम हो रही है। दूसरी ओर बड़ी संख्या में श्रमिक लग्जरी बसों के साथ पार्सल डिलीवरी करने वाले ट्रक में भी गांव जा रहे हैं।
कोरोना रोग के भय के कारण कई श्रमिक पहले से ही पलायन कर चुके हैं इस कारण अब कपड़ा बाजार में माल की डिस्पैचिंग पर असर पड़ने लगा है। मध्यप्रदेश, यूपी, बिहार छत्तीसगढ़ की ओर सिर्फ 20% माल की डिलीवरी हो पा रही है। सूरत टैक्सटाइल गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रमुख ने बताया कि सूरत से प्रतिदिन चार सौ ट्रक भर के पार्सल रवाना होता था। लेकिन जब से टेस्टिंग शुरू हुआ है और मनपा की ओर से जांच के बाद ही प्रवेश करने का निर्णय आया है तब से श्रमिकों की कमी के कारण माल डिस्पैचिंग का काम सिर्फ 20% रह गया है।

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