सूरत : कपड़े पर समान जीएसटी का एम्ब्रॉयडरी इकाइयों पर पड़ सकता है ये असर

12 फीसदी दर होगा तो एम्ब्रॉयडरी इकाइयों पर और 7 फीसदी का बोझ पड़ेगा

कपड़ा उद्योग पर लगाए गए जीएसटी दर एक समान करने की कवायद शुरू की गई है। अगर एक समान दर किए जाएगे तो एम्ब्रॉयडरी यूनिट धारकों की हालत दयनीय हो जाएगी।  एम्ब्रॉयडरी संचालकों से 12 फीसदी दर वसूला जाएगा तो उनका नफा घटने की संभावना है। क्योंकि उनके द्वारा किए जाने वाले जॉबचार्ज पर पांच फीसदी वसूला जाता है। जबकि उन्हें हाल में ज्यादा से ज्यादा 15 फीसदी नफा मिलता ह। जिसके सामने वे कारीगरों का पगार, लाइटबिल, मशीनरी मेन्टेनन्स का खर्च करते है। लेकिन कपड़ा उद्योग में जीएसटी का समान दर किया जाए तो उनका स्लेब पांच फीसदी से 12 फीसदी होने के कारण उन पर बोझ पड़ जाएगा। जिसके कारण एम्ब्रॉयडरी संचालकों को ज्यादा नुकसान होगा। शहर में 10 हजार एम्ब्रॉयडरी यूनिटों में 1.25 लाख एम्ब्रॉयडरी मशीनें कार्यरत है। जिसमें प्रत्यक्ष तौरपर 5 लाख कारीगरों को रोजगार और इससे जुड़े 6 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। अगर जीएसटी दर बढ़ाये गये तो 20 फीसदी व्यापार घट सकता है।
एम्ब्रोयडरी एसोसिएशन के सदस्य जीतेंद्र सुराणा ने बताया कि फिलहाल एम्ब्रॉयडरी में पांच फीसदी जीएसटी वसूल की जाती है। इसमें बढ़ोत्तरी की जाएगी तो एम्ब्रॉयडरी संचालकों पर वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा। जीएसटी लागू होने के बाद पूरे कपड़ा उद्योग की हालत खराब है। इसके कारण छोटे 30 फीसदी व्यापारियों ने अपना कारोबार बंद कर दिया है। कपड़ा उद्योग में एकसमान दर करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार विमर्श करके व्यापारी को नुकसान नहीं हो इस तहर का निर्णय लेना चाहिए।
बिल बिना काम करने का चलन बढ़ेगा
एम्ब्रॉयडरी में जीएसटी का दर बढ़ाया जाएगा तो बिल बिना जॉबवर्क करने के किस्सों में वृद्धि होने की संभावना है। क्योंकि सरकार को ज्यादा टेक्स चुकाने के बजाय व्यापारी अपने रूपये कैसे बचेंगे इसके लिए नया रास्ता खोज निकालेंगे और जिस व्यापारी को बिल की जरूरत होगी उसी को बिल देंगे। बाकी के ज्यादातर काम बिल बिना ही किए जाने की संभावना है।


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