सूरत : कोरोना काल में शालाएं बनीं मिसाल; कहीं कोविड सेंटर तो कहीं वैक्सीनेशन केंद्र शुरु हो गये

प्रतिकात्मक तस्वीर

कोरोना काल में लगातार शिक्षक और स्कूल कर रहे है लोगों की सेवा

कोरोना के कारण बीते 1 साल से लगातार स्कूल बंद रहने के कारण फीस नहीं मिलने से निजी स्कूलों की हालत खराब हो गई है। कई निजी स्कूल संचालक आर्थिक समस्या का सामना कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद कई स्कूलों में कोरोनाकाल में लोगों की सेवा कार्य का सराहनीय कार्य चल रहा है। 
आइसोलेशन वॉर्ड, वैक्सीनेशन सेंटर शुरू करने से लेकर लोगों को जागृति के लिए कैंप लगाने सहित कई जिम्मेदारियां कई स्कूलों में निभाई जा रही है। रांदेर रोड पर संस्कार भारती स्कूल में जरूरतमंदों के लिए विशेष तौर से एसबीवी कोविड-19 केन्द्र शुरू किया गया है।  जिसमें की जानकारो के माध्यम से तथा टेक्निशियनो द्वारा विविध मैसेज आदि की इन्क्वायरी कर भोजन, ऑक्सीजन तथा प्लाज्मा सहित की जानकारियां दी जा रही है साथ ही जरूरतमंदों को कहां पर उचित सहायता की जाएगी यह भी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
वराछा की निजी स्कूल में आइसोलेशन सेंटर शुरू किया गया है। मोटा वराछा की एस्पायर पब्लिक स्कूल में सूरत मंडप डेकोरेटर एंड इलेक्ट्रिक एसोसिएशन, एकता ग्रुप के सहयोग से 40 वॉर्ड वाला ऑक्सीजन सुविधा केंद्र शुरू किया गया है। जिसमें कि दो समय के भोजन की व्यवस्था भी की गई है। इसी तरह से कामरेज की सीबीएस पब्लिक स्कूल में भी सेवा समिति के सहयोग से आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है। पालनपुर पाटिया के विद्याकुंज स्कूल रांदेर रोड की प्रेसिडेंसी स्कूल, योगी चौक की आशादीप स्कूल सहित अनेक स्कूलों में वैक्सिनेशन सेन्टर शुरू किए गए हैं। साथ ही आगामी 1 मई से अन्य कई स्कूलों में भी वैक्सिनेशन सेन्टर शुरू करने का फैसला किया गया है।
शहर में जिस तरह से कोरोना फैल रहा है। ऐसे में लोग घरों में रहना पसंद करते हैं लेकिन शहर के 3000 शिक्षकों ने बैरिकेडिंग, वैक्सीनेशन, कोरोना जागृती अभियान सर्वे सहित अन्य जिम्मेदारियां उठाई है। सूरत महानगर पालिका की ओर से अब ग्रान्टेड स्कूल के शिक्षकों को भी संबंधित काम सौंप दिया है। जिसमें की आचार्य संगठन, माध्यमिक उच्चतर माध्यमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में 500 से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं। पिछले साल जब लॉकडाउन लोग लगा था तो भी कई स्कूलों ने जरूरतमंदों को भोजन देने का सराहनीय कार्य किया था। जिसमें कि लसकाणा की जेबी डायमंड स्कूल, वराछा की आशादीप स्कूल, मीनी इंटरनेशनल स्कूल, जहांगीरपुर की रेडियन्ट स्कूल, पालनपुर पाटिया की विद्याकुंज स्कूल सहित कई स्कूलों ने लोगों को भोजन देने का काम किया था।

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