सूरत : सिविल अस्पताल में सगर्भा को डॉक्टर ने चलने भेजा और लेबर रूम के बाहर ही प्रसुति हो गई!

प्रतिकारात्मक तस्वीर

प्रसव के पहले महिला के हलचल से प्रसूति में आसानी रहने से डॉक्टरों ने भेजा था टहलने

सिविल अस्पताल में एक गर्भवती स्त्री के प्रसूतिघर के बाहर ही प्रसूति होने की घटना सामने आई है। स्त्री रोग विभाग के डॉक्टरों ने गुरुवार सुबह नवागाम की एक गर्भवती महिला को टहलने के लिए भेजा था। इस दौरान ही लेबर रूम के बाहर प्रसव पीड़ा में चली गई और एक बच्चे को जन्म दे दिया। वार्ड के डॉक्टरों सहित स्टाफ ने उसे वार्ड में पहुंचाया और इलाज शुरू किया। हालांकि, एक मृत बच्चा पैदा हुआ था। जबकि डॉक्टरों ने बताया कि महिला की सेहत में सुधार हो रहा है।
जानकारी के अनुसार नवगाम के डिंडोली स्थित गायत्री सोसायटी निवासी प्रतिभा देवीदास पाटिल (उम्र 25) अपने नौवें महीने में थी और उसे तुरंत 108-एम्बुलेंस में सिविल में स्थानांतरित कर दिया गया था। बुधवार की शाम डॉक्टर्स के कहने पर टहलने निकली  लेबर रूम के बाहर  प्रसूति हो गई। प्रतिभा का यहां स्त्री रोग विभाग में इलाज चल रहा था, इसलिए उन्हें सीधे पहली मंजिल पर लेबर रूम में ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने सोनोग्राफी में जांच कराई तो पता चला कि अजन्मे बच्चे की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों ने उसे यह कहते हुए भर्ती कराया कि उसकी नॉर्मल डिलीवरी होगी, और आवश्यक दवा दी और उसे लेबर रूम से बाहर लॉबी में चलने को कहा।
इस बीच गुरुवार की सुबह प्रतिभा सास ऊषाबेन और बहन वैशाली की मदद से लेबर रूम से बाहर निकल रही थी। तभी अजन्मे बच्चे का सिर बाहर निकल आया। इसके बाद, वार्ड के डॉक्टरों सहित स्टाफ लॉबी में पहुंचा और प्रतिभा को तुरंत वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। स्त्री रोग विभाग के डॉ प्रोफेसर सलिल भाटिया ने कहा कि बुधवार को प्रतिभा की परीक्षा के दौरान पता चला कि उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में डिलीवरी में करीब 24 से 48 घंटे का समय लगता है। ऐसे में अगर गर्भवती महिला की हलचल बढ़ जाती है तो प्रसव पहले हो जाता है। इसलिए गर्भवती महिला को जरूरी दवा देने के साथ चलने को कहा जाता है। माता का स्वास्थ्य अच्छा है। प्रतिभा पहले दो बेटियों की मां हैं।

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