सूरत : पालिका के क्वॉटा के मरीज को निजी अस्पताल ने 12 घंटे स्ट्रैचर पर इंतजार करवाया

पालिका द्वारा रिफर किए मरीज को स्ट्रेचर पर ही शुरू किया ऑक्सीज़न, लोगों में है काफी रोष

कोरोना काल में कई निजी अस्पतालों द्वारा मानवीय अभिगम को पीछे रखकर मानो धंधा करते होने की कई बार शिकायत सामने आई है। इलाज के नाम पर लूट चलाने वाले इन अस्पतालों ने मानो मानवता को गिरवी रख दिया हो ऐसी स्थिति का निर्माण हुआ है। शहर की एक निजी अस्पताल में पालिका द्वारा रिफर किए गए मरीज को तुरंत भर्ती करने की जगह 12 से 13 घंटे के बाद स्ट्रेचर पर ही ऑक्सीजन के साथ रखे होने का एक चौंकाने वाला किस्सा सामने आया है।
विस्तृत जानकारी के अनुसार, वलसाड के एक मरीज को 5 दिन पहले पालिका की स्मीमेर हॉस्पिटल में कोरोना के इलाज के लिए दाखिल किया गया था। दर्दी का ऑक्सीजन स्तर काफी कम हो जाने के कारण उनका ट्रीटमेंट शुरू किया गया। 3 दिन के इलाज के बाद मरीज की तबीयत में थोड़ा सा सुधार देखा गया। जिससे की स्मीमेर के डॉक्टरों ने मरीज को पालिका के क्वोटा के अनुसार एक निजी अस्पताल में रेफर किया था। परिवार के सदस्य मरीज को लेकर शुक्रवार सुबह 9 बजे स्मीमेर से पुना गांव के एक निजी अस्पताल में ले गए।
ऑक्सीजन की जरूरत वाले इस मरीज को तात्कालिक अस्पताल में दाखिल करने की जगह निजी अस्पताल के स्टाफ में स्ट्रेचर पर ही उसे काफी समय राह दिखाई थी। अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में मरीज को स्ट्रेचर पर ही ऑक्सीजन दिया जाने लगा। सुबह से दोपहर और दोपहर से शाम हो जाने के बावजूद पालिका द्वारा रीफर किए गए मरीज को कोई बेड दिया गया नहीं। अंत में जब मरीज के परिवार का आपा बाहर हुआ तो उन्होंने अस्पताल के साथ काफी बहस की। भारी बहस के बाद रात को 10:00 बजे मरीज को बांट दिया गया था। इस तरह कठिन समय में भी निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों के साथ इस तरह का भेदभाव पूर्ण होने के कारण काफी लोगों ने अपनी शिकायतें दर्ज की है। 

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