सूरतः बिल नहीं भरने पर निजी अस्पताल ने कोरोना मरीज के मृतदेह को सड़क पर रख दिया

अस्पताल द्वारा कोरोना मरीज के मृत देह को सड़क पर रख देने पर परिजनों से मचाया बवाल

हमें न्याय मिले या न मिले, हमारे पास मानवता है इसलिए हम अपने बेटे का शव लेंगे और अंतिमविधि कर उसकी आत्मा को शांति देंगेः मृतक के पिता

सूरत के पांडेसरा में प्रिया जनरल अस्पताल के संचालकों ने कोरोना मरीज के मृतदेह को सड़क पर रख देने से कापी बवाल हुआ। शनिवार को तड़के हुई इस घटना के बाद, पुलिस मौके पर पहुंची और माहौल को शांत किया और दोनों पक्षों की बात सुनी। मृतक के परिवार ने  गंभीर आरोप लगाया कि अस्पताल के बिल का भुगतान न करने पर इस तरह का कृत्य किया गया। हालांकि, पांडेसरा पुलिस फिलहाल जांच कर रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शव को बाहर रखने के बाद स्थानीय अग्रणियों ने अस्पताल प्रशासन से बातचीत की, लेकिन उन पर मानो कोई प्रभाव नहीं हुआ। अस्पताल पूरा पैसा लेने पर ही अड़ा हुआ था। इसके बाद परिवार के विरोध करने व पुलिस के पहुंचने के बाद अस्पताल प्रशासन का सुर बदला। 
 मृतक भगवान नायक के पिता त्रिनाथ नायक ने कहा कि बेटे को दो दिन पहले बुखार आया था। इस डॉक्टर को दिखाया गया था, जिसने उसे दवा दी थी। हालांकि,ठीक नहीं होने पर हमने डॉक्टर से बात की तो डॉक्टर ने  प्रिया जनरल अस्पताल लाने की बात कही। जब हम अस्पताल ले आये तो कहा भर्ती करना पड़ेगा, एक्स-रे करवाना होगा ऐसा कहते हुए 2500 रुपये में ठीक हो जाएगा ऐसा कहा। 
उन्होंने आगे कहा कि एक्स-रे लेने के बाद अधिक खर्च होगा, जाओ यह दवा ले आओ, इस तरह दो दिनों में 4500 रुपये का दवा मंगवाया था। इसके बाद  10,000-10,000 रुपये दो बार डिपोजिट जमा कराया।  जब उनके बेटे की मृत्यु हो गई, तो उसका मृतदेह अस्पताल के बाहर सड़क पर रखवा दिया और अस्पताल का दरवाजा बंद कर दिया गया। जिससे हमने पुलिस को बुलाया। हमें न्याय मिले या न मिले, हमारे पास मानवता है इसलिए हम अपने बेटे का शव लेंगे और अंतिमविधि कर उसकी आत्मा को शांति देंगे।
अस्पताल संचालक ने आरोपो को नकारा
 निजी अस्पताल के प्रबंधक तॉ. जीतु पटेल ने कहा कि मरीज 18 तारीख को भर्ती हुआ था और गुरुवार तक स्थिर था। हमारे अस्पताल के एमडी ने चिकित्सक को इंजेक्शन लिखा था, लेकिन परिवार के पास इसे लेने के लिए पैसे नहीं थे। मैंने पैसे दिए और गणेश मेडिकल से इंजेक्शन मंगवाया। शुक्रवार शाम को मरीज की अचानक मौत हो गई और उसके पिता को समय रहते सूचित कर दिया गया। मेरे पास यह भी रिपोर्ट है कि 60 प्रतिशत तक फेफड़े में संक्रमण था। मौत के बाद मृतक के पिता ने कहा कि वह रिश्तेदारों के आने के बाद शव ले जाएगा। साहेब 1 लाख 7 हजार का बिल था, 20 हजार रुपये जमा किया था। उपर के पैसे भी नहीं मांगा। शुक्रवार आधी रात को रिश्तेदारों के पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे। यह बात लगभग रात ढाई बजे की है। हालाँकि किसी के कहने पर परिवार ने विरोध किया और अस्पताल को बदनाम करने के लिए मीडिया को बुलाया गया। मैंने पुलिस को बुलाया और पूरी इलाज की फाइल पुलिस को सौंप दी। मैं सही हूँ, किसी  के कहने पर परिवार ने बवाल किया है। बावजूद इसके मैं शिकायत नहीं की। परिवार गरीब है  उसने किसी के कहने पर ऐसा किया था, फिर भान में आया और अंतिम संस्कार के लिए शव ले गये।

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