सूरत : मां की आराधना में गरबा खेलकर अनोखे तरीके से भ्रूण संस्कार का पाठ सीख रही गर्भवती महिलाएं

गर्भवती महिलाओं के लिए गरबा एक प्रकार का है व्यायाम

गरबा गर्भवती महिलाओं के लिए एक प्रकार का हृदय व्यायाम है

गरबा रक्त संचार के माध्यम से बच्चे को ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है
शहर में गर्भवती महिलाएं गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को बढ़ाने के अनोखे तरीके से भ्रूण संस्कार का पाठ सीख रही हैं। प्रेग्नेंसी सेंटर की निदेशक तुसीताबेन का कहना है कि गरबा भी हृदय संबंधी व्यायाम का ही एक रूप है। जो गर्भवती माताओं को तनाव मुक्त बनाता है और गर्भ में पल रहे बच्चे का घेरा बढ़ाने में मदद करता है।
तुसीताबेन राठौर (तुसीता ए टू जेड प्रेग्नेंसी सेंटर) ने कहा कि 10 साल से गर्भवती महिलाओं को योग, ध्यान सहित विभिन्न प्रकार के जागरूकता का पाठ पढ़ाया जाता रहा है। केंद्र न केवल गर्भवती महिलाओं को बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की जागरूकता के बारे में शिक्षित करता है। 10 वर्षों में हजारों माताओं ने स्वस्थ बच्चों को जन्म देने के लिए इस केंद्र का लाभ उठाया है।
उन्होंने कहा कि यह योग का एकमात्र केंद्र है जहां हर गर्भवती महिला के लिए हर त्योहार अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। यह पुरानी मान्यताओं को हटाकर जागरूकता का पाठ पढ़ाती रही है। नियमित कार्य करने से गर्भावस्था में विभिन्न प्रकार के हार्मोन रिलीज होते हैं। जिससे बच्चे की ग्रोथ बढ़ती है और गर्भवती महिला का मानसिक तनाव दूर होता है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने अब कोरोना काल  के दो साल बाद नवरात्रि आयोजित करने की अनुमति दी है। लेकिन डर का कोई इलाज नहीं है, इसलिए इस केंद्र पर गर्भवती महिलाओं के लिए नवरात्रि विशेष 'गर्भावस्था गरबा' का आयोजन किया गया है। प्रतिदिन डेढ़ घंटे केंद्र में अनेक सगर्भा माताएं खेलती हैं। डांस से खुशी का माहौल बनता है। ऐसा करने से रक्त संचार के माध्यम से शिशु को ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ जाती है।

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