सूरतः सिविल अस्पताल में मां और वलसाड में होम आइसोलेशन में 9 वर्षीय बेटी ने कोविड -19 को हराया

कोरोना से मां और बेटी को मुक्त करने के लिए डॉक्टरों का माना आभार

उपचार ले रही माता का बेटी के दयालु भरे शब्दों से मनोबल बढ़ा

फोटो लाइन-कोरोना से मां और बेटी को मुक्त करने के लिए डॉक्टरों का माना आभार 
कोरोना महामारी में बहुत कुछ बदल गया है। जो नहीं बदला है वह है लोगों की सेवा, भावनाएं और परिवार के प्रति प्रेम। जो व्यक्ति को हर मुश्किल का सामना करने की ताकत देता है। हमेशा कहा जाता है कि 'दुनिया में मां से बड़ा कोई योद्धा नहीं हैं' और इस कहावत को कई महिलाओं ने सार्थक भी किया है। इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है वलसाड में ट्युशन क्लासेस चलाने वाली 38 वर्षीया शिक्षिका  स्वप्नाबेन संदीपभाई सेघावाला। 
वलसाड में अपनी 9 वर्षीय बेटी और पति के साथ रहने वाली स्वप्नाबेन ने 24 अप्रैल को टोनसील की समस्या और बुखार होने पर  कोविड -19 का परीक्षण कराया तो रिपोर्ट पॉजीटिव आया।  इसी समय, परिवार के सदस्यों का टेस्ट कराने पर नौ वर्षीय बेटी का रिर्पोट भी पॉजीटिव आया। अगले दिन स्वप्नाबेन को अचानक सांस लेने में अधिक परेशानी होने लगी। परिवार ने स्वप्नबेन को सूरत के सिविल अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया क्योंकि उन्हें वलसाड के आसपास के अस्पतालों में जाँच करने पर कोई जगह नहीं मिली। उन्हें वलसाड से सूरत एम्बुलेंस में लाया गया। नौ साल की बेटी कश्वी की  घर पर अलगाव में रहकर  इलाज शुरू किया।
नई सिविल अस्पताल में निःश्लक उपचार के बाद स्वस्थ हुई स्वप्नाबेन ने कहा कि सांस लेने में कठिनाई होने पर मुझे 25 अप्रैल को ऑक्सीजन पर लाया गया था। उनके स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद , उन्हें 3 मई से एक सामान्य कमरे में रखा गया।  अस्पताल के डॉक्टरों की लगातार देखरेख, नियमित जांच और समय पर इलाज की सुविधा मिली है। जब वे घर से चली तो बेटी काशवी ने कहा, "मम्मी, अगर आप घर आएंगी, तो मेरा कोरोना भी गायब हो जाएगा। बेटी के ऐसे शब्दों से मन में नई शक्ति का संचार हु्आ था।
जब स्वप्ना बहन कोरोना को मात देकर 4 मई को घर पहुंची, तो उसने 10 दिन बाद अपनी बेटी से मिली। उसने कहा कि उसकी बेटी से मिलने की खुशी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। नई सिविल अस्पताल के डॉ. अमित गामित, एवं डॉ. जिनल म‌िस्त्री द्वारा योग्य उपचार किया गया। जिससे वे  10 दिनों की छोटी अवधि में कोरोना-मुक्त हुई। 

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