सूरत : गिरते ऑक्सिजन से झूझ रहे मरीजों को फिजियोथैरपिस्ट प्रोनिंग थेरापी करवा कर कर रहे मदद

(Photo Credit : gujaratsamachar)

मात्र 10 मिनट की कसरत से 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ता है ऑक्सीज़न का प्रमाण

राज्य में कोरोना के कारण मरीजों की हालात काफी खराब हो चुकी है। खास तौर पर कोरोना महामारी के डर के कारण लोग मानसिक तौर पर काफी डरे हुये है। जिसके चलते मरीजों को नई-नई तकनीक वाली आरोग्यलक्षी प्रवृतियाँ कर उनके डर को कम करने का प्रयास हो रहा है। नई सिविल अस्पताल में फिजियोथेरपी कॉलेज के प्रिंसिपाल डॉ. ध्वनित शाह ने कहा की आम तौर पर कोरोना के मरीज 94 प्रतिशत से कम होने लगे तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। 
ऐसे में ऑक्सीज़न की कमी को दूर करने के लिए प्रोनिंग थेरापी का इस्तेमाल किया जाता है। इस थेरापी में व्यक्ति को जागृत अवस्था में बेड पर उल्टा सुला दिया जाता है। इसके बाद उनके छाती और पेर के नीचे तकिया रख कर तेजी से सांस अंदर और बाहर करने के लिए कहा जाता है। मरीज का ऑक्सीज़न लेवल बढ़ाने में यह तकनीक काफी सहायक है। मात्र 10 मिनट की इस एकसरसाइज़ खून में ऑक्सीज़न का प्रमाण 5 से 10 प्रतिशत जितना बढ़ा सकती है। इस तकनीक की सहायता से मरीज की बायपेप या वेंटिलेटर पर आने की संभावना को कम किया जा सकता है। 
सिविल अस्पताल के डॉ. रागिनीबेन वर्मा कहती है की सिविल अस्पताल की कोविड बिल्डिंग और किडनी बिल्डिंग के मिललकर सभी तीन बिल्डिंग में मरीजों के लिए प्रोनिंग थेरापी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से होम क्वारंटाइन मरीजों को भी फायदा हो सकता है। सरकारी फिजियोथेरापी कॉलेज के डॉक्टर और छात्र को मिलाकर कुल 70 लोगों का स्टाफ यह थेरापी करवा रहा है। जिसमें की कोविड अस्पताल में 40, सिविल में 10 और किडनी अस्पताल में 20 डॉक्टर दिन में डॉ बार मरीजों को यह कसरत करवा रहे है। फेफड़ों के लिए प्रोनिग की कसरत संजीवनी के समान है। कई केस में प्रोनिंग करने से मरीजों के ठीक होने के और रिकवर होने के प्रमाण में भी काफी इजाफा देखने मिल रहा है। 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें