सूरत : निजी अस्पतालों में हो रही है रेमडेसिविर इंजेक्शन की अधिक खपत

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)

मात्र 8 दिनों में ही 23 हजार इंजेक्शनों का किया गया इस्तेमाल, मात्र गंभीर मरीजों के लिए ही जरूरी है रेमड़ेसिविर इंजेक्शन

सूरत में कोरोना वायरस बेकाबू होते जा रहा है। शहर में कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। शहर के निजी हॉस्पिटल और सरकारी अस्पताल में मरीजों से भर गई है। गंभीर मरीजों को रेमडिसिविर इंजेक्शन की जरूरत होती है। 8 दिन में ही प्राइवेट हॉस्पिटलों के मरीजों के लिए सिविल से अंदाजन 23,000 इंजेक्शन दिए गए हैं। वहीं सिविल हॉस्पिटल में 19 दिन में 34,000 इंजेक्शन का उपयोग किया गया है।
शहर के अलग-अलग होस्पिटल में मरीज कोरोना के कारण उपचार ले रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक मरीज सिविल हॉस्पिटल में 1360 है। इसके अलावा सहारा दरवाजा की मनपा संचालित हॉस्पिटल स्मीमेर में 570 से अधिक मरीज उपचाराधीन है। जबकि निजी हॉस्पिटल में 1595 मरीज दाखिल हैं। निजी हॉस्पिटल को भी रेमडिसिविर इंजेक्शन के लिए सिविल अस्पताल को नामांकित किया गया है। इसलिए निजी हॉस्पिटल को 8 दिन में ही 23000 इंजेक्शन सिविल हॉस्पिटल से दिया गया और 19 दिन में सिविल हॉस्पिटल में लगभग 34000 इंजेक्शन का उपयोग किया गया।
सिविल हॉस्पिटल में तीन बिल्डिंगों में कोरोना के मरीज हैं लेकिन वहां पर निजी हॉस्पिटल के अपेक्षा कम इंजेक्शन का उपयोग हो रहा है ऐसा प्रतीत होता है। जानकारों का कहना है कि रेमडिसिविर का उपयोग जिन मरीजों को गंभीर असर होती है उन्हें रेमेडेसिविर इंजेक्शन दिया जाता है। सामान्य मरीजों को रेमडेसीविर इंजेक्शन नहीं दिया जा सकता। उपचार के दौरान यदि डॉक्टर को जरूरत लगे, सी रिएक्टिव का प्रोटीन अधिक हो और कमजोरी के साथ दस्त हो रहा हो ऐसे मामलों में रेमडिसिविर दिया जा सकता है।

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