सूरतः हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ज्वैलर्स की परेशानी बढ़ी, जानें क्या है माजरा

प्रतीकारात्मक तस्वीर

शहर में सिर्फ 8 ही संस्था होने से 2500 ज्वैलर्सों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा

ज्वैलर्स के पास 12,16, 20 कैरेट के 6 टन के 40 करोड़ के आभूषण तैयार हैं
केंद्र सरकार ने 15 जून से सोने के गहनों पर गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी है। सभी ज्वैलर्स के लिए केवल बीआईएस प्रमाणित आभूषण ही बेचना है। सूरत में 2500 ज्वैलर्स के सामने हॉलमार्किंग करने वाली सिर्फ 8 संस्थाएं हैं। जिससे ज्वैलर्सों को परेशानी का समाना करना पड़ सकता है। सरकार ने यह नियम 14, 18 और 22 कैरेट के लिए नया नियम बनाया है। लेकिन सूरत में ज्वैलर्स के पास 12, 16 और 20 कैरेट के करीब 6 टन सोने के आभूषण हैं। अब ज्वैलर्स को ज्वैलरी की फिर से डिजाइन करना होगा, जिससे ज्वैलर्स को  अनुमानित रूप से 40 करोड़ रुपये नुकशान होगा। ।
सवाल यह है कि हॉलमार्किंग लगाने के बाद घर या लॉकर में पड़े पुराने गहनों का क्या होगा। आप किसी भी हॉलमार्किंग सेंटर या ज्वेलरी बेचने वाले के पास जा सकते हैं और पुराने गहनों की हॉलमार्किंग करवा सकते हैं। पुराने गहनों की कीमत अधिक होगी। दूसरे, हॉलमार्किंग का यह नियम सोने के आभूषण बेचने वाले ज्वैलर्स पर लागू होगा। ग्राहक बिना हॉलमार्क के भी बिक्री कर सकता है।
हॉलमार्किंग नियम लागू होने के बाद सिर्फ 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट के आभूषण ही बेचे जाएंगे। हॉलमार्किंग पर बीआईएस की मुहर, कैरेट की जानकारी होगी। आभूषण बनाने की तिथि और ज्वलेर्स का नाम भी रहेगा। बीआईएस हॉलमार्किंग प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों से जुड़ी है। लेकिन  ग्राहक अब 22, 18 और 14 कैरेट के अलावा अन्य ज्वैलरी नहीं खरीद पाएंगे।
इंडिया गोल्ड लैब हॉलमार्क सेन्टर सूरत के संचालक एवं सूरत ज्वेलरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के उप प्रमुख बासुदेव अधिकारी ने बताया कि हॉलमार्किंग नियम लागू होने से ज्वेलर्सो की कालाबाजारी बंद हो जाएगी। जबकि ग्राहकों को फायदा होगा। पहले ज्वेलर्स 18, 20 कैरेट के आभूषण 22 कैरेट बताकर ग्राहकों दे देते थे। अब ऐसा नहीं हो पाएगा। कारण कि हॉलमार्क के साथ  ज्वेलर्स नाम व दिनांक भी अंकित होगा। 

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