सूरत : पत्नी और बीमार बच्चे की ज़िम्मेदारी लेने से दुबई रिटर्न पति ने किया इंकार, फेमिली कोर्ट ने दिया ऐसा निर्णय...

प्रतिकात्मक तस्वीर

ऑटिस्टिक बीमारी से पीड़ित बच्चे के इलाज के लिए हर महीने पति को 40 हजार रुपये का मुआवजा देने का दिया आदेश

सूरत की फेमिली कोर्ट ने अब तक के सबसे बड़े मासिक मुआवजा दिलाने वाले अपने निर्णय में पति को हर महीने अपने बच्चे के इलाज के लिए 40 हजार प्रति महीने देने का आदेश दिया है। शहर के सैयदपूरा इलाके में रहने वाले महिला के पति ने उसकी और बालक की ज़िम्मेदारी उठाने से इंकार कर दिया था। जिसके बाद फेमिली कोर्ट में पहुंचे इस केस में कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था। 
विस्तृत जानकारी के अनुसार, सैयदपूरा इलाके में रहने वाली महिला की शादी उसी इलाके में रहने वाले युवक परिनाज गब्बा के साथ हुई थी। परिनाज दुबई में काम करता था। जिसके चलते वह पत्नी को भी शादी के बाद दुबई लेकर चला गया। हालांकि वहाँ पहुँचने के बाद पता चला कि वहाँ उन दोनों को एक ही रूम में अन्य दो पुरुषों के साथ रहना था। जिसके चलते महिला ने परिनाज से इस बारे में सवाल किया। इसके चलते परिनाज ने उस पर सितम करना शुरू कर दिया। पत्नी की जानकारी के बाहर ही उसने उसके गर्भ धारण करने की दवा भी शुरू कर दी थी। इस बीच महिला को एक बार मिसकैरेज भी हुआ था। 
पति द्वारा प्रताड़ित किए जाने के चलते महिला दुबई से वापिस आ गई। महिला जब दुबई से वापिस आई तो उसे छह महीने का गर्भ भी था। जिससे महिला को फैजान नामक संतान भी हुई। हालांकि बालक ऑटिस्टिक बीमारी से पीड़ित था। इसी दौरान साल 2021 में परिनाज सूरत आया था। पर उसने पत्नी और संतान की ज़िम्मेदारी उठाने से मना कर दिया। इसके चलते पत्नी ने वकील प्रीतिबेन जोशी और शिवानी चाहवाला के द्वारा फेमिली कोर्ट में बालक के इलाज के लिए प्रति महीने 80 हजार के मुआवजे के लिए कोर्ट में केस दाखिल करवाया था। हालांकि फेमिली कोर्ट की तरफ से इलाज के लिए हर महीने 40 हजार रुपये देने का आदेश किया गया था।

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