सूरत : ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सूरत मेट्रो’ का काम जोरो पर, अंडरग्राउंड रूट का हुआ सर्वे

प्रतिकात्मक तस्वीर

मेट्रो रेल के गुजरने पर अंडर ग्राउंड रूट के आसपास की जर्जर संपत्तियों के प्रभावित होने की संभावना

शहर का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सूरत मेट्रो रेल प्रोजेक्ट’ तेजी से फलफूल रहा है। इस काम से जुड़े विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण और मृदा परीक्षण का कार्य प्रगति पर है। साथ ही मेट्रो रेल के मार्ग पर आने वाली संपत्तियों के मालिकों को नोटिस भी दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मेट्रो रेल के गुजरने पर अंडर ग्राउंड रूट के आसपास की जर्जर संपत्तियों के प्रभावित होने की संभावना है। ऐसे जीर्ण-शीर्ण संपत्तियों की सूची भी सर्वे कर तैयार की गई है। सर्वे से संपत्ति पर पड़ने वाले प्रभाव का भी विभिन्न तंत्रों द्वारा अध्ययन किया जाएगा और फिर इसके निवारण की योजना बनाई जाएगी।
आपको बता दें कि मेट्रो रेल परियोजना के तहत सरथाना से ड्रीम सिटी तक का 21 किमी का मार्ग कपोदरा से चोकबाजार तक एक भूमिगत मार्ग है, जिसमें छह स्टेशन शामिल हैं। जब भूमिगत से बोरिंग करके इस मार्ग पर काम शुरू होता है तो यह  कितना कंपन पैदा कर सकता है? जल्द कार्य शुरू करने के लिए GMRC भूमिगत रेल मार्ग पर मौजूदा संपत्तियों और उसकी जानकारी की सूची तैयार कर ली गई है। इस प्रक्रिया के लिए, जीएमआरसी मेट्रो रेल की गति या सुरंग बोरिंग मशीन (टीबीएम) द्वारा उत्पन्न कंपन की मात्रा की निगरानी मार्ग से सटे कुछ संपत्तियों पर एक सेंसर लगाकर करेगा। 
जानकारी के अनुसार प्रॉपर्टी को सर्वे के आधार पर स्ट्रेंथ सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। इस सर्वे के लिए प्रॉपर्टी मालिकों ने सर्वे में सहमति के लिए फॉर्म भरना शुरू कर दिया है। यदि सर्वेक्षण के दौरान संपत्ति को नुकसान होता है, तो लागत जीएमआरसी द्वारा वहन की जाएगी। जीर्ण-शीर्ण संपत्तियां अधिक प्रचलित हैं, खासकर कोट क्षेत्र में, इसलिए मेट्रो अधिकारी तेजी और सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

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