सूरत: 100 दिन दिनों के उपचार के बाद कोरोना मुक्त हुए कोरोना योद्धा डॉ. संकेत मेहता ने प्लाज्मा दान किया

कोरोना योद्धा डॉ. संकेत मेहता ने प्लाज्मा दान किया

डॉ. संकेत मेहता ने आईसीयू में ऑक्सीजन पर होने के बावजूद इंट्युबेशन कर मरीज की बचाई थी जान

कोरोना के गंभीर रोगियों के लिए प्लाज्मा उपचार आशीर्वाद समान है। प्लाज्मा दान के लिए  सूरत के नागरिक राज्य भर में  अग्रणी रहे हैं।  सूरत के 39 वर्षीय एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकेत मेहता वर्ष 2020 में कोरोना के पहले चरण में 100 दिनों के उपचार के बाद कोरोना मुक्त हुए थे शहर के 39 वर्षीय एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकेत मेहता  ने प्लाज्मा दान करके अपनी सामाजिक जिम्मेदारी पूरी की है।
कोरोना योद्धा डॉ. संकेत मेहता पिछले साल सितंबर में कोरोनाग्रस्त हुए थे। उस दरम्यान बाप्स अस्पताल में आईसीयू में ऑक्सीजन पर रहने के बावजूद एक गंभीर रूप से बीमार रोगी के जीवन को इंट्युबेशन कर बचाया था।  इंट्युबेशन मुंह या नाक के माध्यम से वायुमार्ग (श्वासनली) में एक वेंटिलेटर के लचीले डक्ट को डालने की प्रक्रिया है। ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर वेंटिलेटर की मदद से बाहरी सांस दी जाती है। वेंटिलेटर आंतों को सांस लेने में सक्षम करके श्वास का समर्थन करने के लिए काम करता है। उनके काम को पूरे राज्य में काफी सराहा गया। उनके समय पर कार्रवाई से एक गंभीर मरीज की जान बच गई, लेकिन डॉ. संकेत मेहता की तबीयत काफी खराब हो गई। उस समय गंभीर हालत में होने के कारण उन्हें एयर एम्बुलेंस के जरिए चेन्नई के एमजीएम में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। 
शहर के पाल इलाके में रहने वाले और लाइफ़लाइन अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट के रूप में काम करने वाले डॉ. संकेत मेहता ने कहा, कि जब कोविड के पहले चरण में संक्रमित थे, तो मैं कोरोना के खिलाफ जीवन-मौत से जूझ रहा था। बाप्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर रहे, लेकिन हालत नही सुधारने पर ऑक्सीजन-ईसीएमओ पर एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन रखा गया। सूरत में डेढ़ महीने और फिर आगे के इलाज के लिए डेढ़ महीने चेन्नई की एमजीएम अस्पताल में इलाज कराया गया था। सौभाग्य से 100 दिनों की लंबी उपचार के  बाद कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीती।  एक डॉक्टर के रूप में मुझे एहसास हुआ कि जीवन कितना कीमती है। हमारा प्लाज़्मा एक कोरोना रोगी का जीवन रक्षक बन जाता है। उन्होंने जिनकी एन्टीबॉडी बने गये हैं उन सभी से  आगे आने की अपील की। 

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