सूरत : एसजीएसटी में नोटिस भेजे बिना नंबर सस्पेंड करने के मामले बढ़े

सीजीएसटी और एसजीएसटी की दोहरी नीति

व्यापारियों की गलती हुई हो या तो फर्जी बिलिंग में शामिल होने की बात सामने आने पर उसका नंबर सस्पेंड करने से पहले नोटिस भेजने का नियम जीएसटी कानून में बनाया गया है। लेकिन फिलहाल नोटिस भेजे बिना ही नंबर सस्पेंड करने के मामले में बढ़ोत्तरी होने से व्यापारी परेशान है। जीएसटी नंबर सस्पेंड करने में स्टेट जीएसटी और सेंट्रल जीएसटी अधिकारियों की दोहरी नीति के कारण व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई है। क्योंकि नियम के मुताबिक व्यापारी का जीएसटी नंबर सस्पेंड करने से पहले उसे नोटिस भेजनी होती है। जिससे व्यापारी द्वारा उसका जवाब दिया जा सके या तो जवाब नहीं दिए जाने पर समय मर्यादा में नंबर सस्पेंड करना होता है। इसके मुताबिक कार्यवाही सेंट्रल जीएसटी अधिकारियों द्वारा की जा रही है। 
वहीं स्टेट जीएसटी के अधिकारी ऐसी कोई कार्यवाही किए बिना व्यापारी का नंबर पहले सस्पेंड कर दे रहे है। इसके कारण व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ी है। नंबर सस्पेंड करने के लिए एक ही कानून होने के बावजूद दो अलग- अलग विभाग अलग-अलग कार्यवाही किए जाने से व्यापारी परेशान हो रहे है। व्यापारी नंबर सस्पेंड होने के कारण व्यापार नहीं कर सकता। वहीं सामने वाला व्यापारी भी उससे माल खरीदता नहीं। क्योंकि ऐसे व्यापारी से माल खरीदा जाए तो व्यापारी की इनपुट टेक्स क्रेडिट मिलने पर पूर्णविराम लग जाता है। इसी समस्या के कारण व्यापारी की हालत दयनीय हो जाती है। व्यापारी इस समस्या से निजात दिलाने की मांग कर रहे है।

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