सूरत भाजपा कार्यायल से रेमडेसीवीर वितरण : पाटिल-संघवी से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

गुजरात प्रदेश भाजपाध्यक्ष सी आर पाटिल (File Photo)

राज्य सरकार, पुलिस कमिश्नर और ड्रग्स विभाग से भी कोर्ट ने मांगा उत्तर

कोरोना संक्रमण में कारगर माने जाने वाली रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कमी है। ऐसे में भाजपा के प्रदेश प्रमुख सीआर पाटील ने लोगों को 5000 इंजेक्शन बांटे थे। इस बारे में विरोध पक्ष के नेता परेश धानाणी द्वारा प्रदेश प्रमुख सीआर पाटील और विधायक हर्ष संघवी के खिलाफ जांच की कार्यवाही की मांग हाईकोर्ट में की गई थी। परेश धानाणी ने की जनहित याचिका की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस की बेंच ने इस बारे में प्रदेश प्रमुख सीआर पाटील और विधायक हर्ष संघवी को जवाब देने के लिए 1 सप्ताह का समय दिया है।
हाईकोर्ट ने इस बारे में राज्य सरकार, सूरत पुलिस कमिश्नर, ड्रग्स विभाग के कमिश्नर को नोटिस दिया है। जिसमें बताया गया है कि किसी राजकीय पक्ष की ओर से इंजेक्शन बांटने की कार्यवाही से नियम भंग होता है इस बारे में जांच करवानी चाहिए। जनहित याचिका के पक्ष में एडवोकेट आनंद याग्निक ने बताया था कि गुजरात में रेमेडेसिविर इंजेक्शन कम है जिसके कारण विकट परिस्थिति बनी है। ऐसे में प्रदेश प्रमुख ने 5000 इंजेक्शन बांटे हैं जिसमें कि विधायक हर्ष संघवी ने उनकी मदद की है। 
(Photo Credit : facebook.com/sanghviharsh)रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है और ऑक्सीजन से उपचार ले रहे हैं गंभीर मरीजों को भी डॉक्टर की निगरानी में ही दी जा सकती है। इंजेक्शन के बाद डॉक्टरी मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। इसके बावजूद दोनों नेताओं ने प्रिसक्रिप्शन के आधार पर ही दवाइयां बांटी हैं। ऐसा करने से फार्मेसी एक्ट 1949 सेक्शन 42 का भंग हुआ है जिसमें की जो व्यक्ति रजिस्टर्ड नहीं है, लेकिन दवा बांट रहे हैं उनके बारे में उल्लेख किया गया है। इस सेक्शन में फार्मासिस्ट के सिवाय अन्य कोई व्यक्ति मेडिकल दवाई नहीं दे सकता है। साथ ही वकील ने यह भी दलील की है कि कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ 6 महीने की सजा का प्रावधान है। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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