अस्पताल के बाहर में पिता से मिलने हाथ में ज्यूस लेकर कतार में खड़ा था बेटा, लेकिन अंदर...

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

तीन घंटे तक हाथ में ज्यूस लेकर खड़ा रहा पुत्र, कोरोना के समय में खुल रही है अस्पताल प्रशासन की पोल

राज्य में कोरोना के केस लगातार बढ़ते जा रहे है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखने मिल रहा है। पर अस्पताल के अंदर मरीज के किसी भी परिजन को जाने के अनुमति नहीं दी जा रही है। अस्पताल के अंदर मरीज का इलाज सही से हो रहा है या नहीं उसकी चिंता करने वाला या देखने वाला भी कोई नहीं है। एक ऐसा ही किस्सा राजकोट से सामने आया है, जहां समरस हॉस्टल में भर्ती अपने पिता को मिलने के लिए खड़े पुत्र को मिली तो सिर्फ अपने पिता की मौत की जानकारी। 
विस्तृत जानकारी के अनुसार, राजकोट के गोकुल पार्क में रहने वाले हिमांशु अग्रावत के पिता बाबूलाल अग्रावत के पिता को शनिवार को अस्पताल में भर्ती किया गया था। अस्पताल में पिता को भर्ती करवाने के बाद हिमांशु और उसकी पत्नी वापिस घर आ गए थे। दूसरे दिन जब हिमस्न्हु अपने पिता को उनका हालचाल पूछने और उन्हें ज्यूस देने के लिए अस्पताल के पीछे आए वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम के बाहर तीन घंटे तक खड़े रहे थे। जिसके बाद उन्होंने अपना नाम रजिस्टर करवाया। हालांकि इसके बाद डेढ़ घंटे इंतजार करने के बाद भी उनकी अपने पिता से बात नहीं हो पाई, जिस पर काउंटर पर से जवाब मिला की अस्पताल में बाबूलाल अग्रावत नाम का कोई मरीज नहीं मिल रहा है। 
काफी समय तक राह देखने के बाद भी पिता से बात ना हो पाने के कारण पुत्र को शंका गई थी। इसी बीच पुत्र के हाथ में एक वीडियो आया था, जिसमें उसके पिता को समरस हॉस्टल में एम्ब्युलेंस के ड्राईवर द्वारा पंपिंग किया जा रहा था। वीडियो को देखते ही हिमांशु तुरंत ही समरस हॉस्टल पहुंचे, जहां उनके पिता की मौत हो चुकी थी। पिता के इस तरह चले जाने के चलते पुत्र तथा घर के अन्य सदस्य काफी आहत हो गए थे। अपनी व्यथा बताते हुये हिमांशु ने कहा की उन्हें जानकारी मिली की शनिवार को शाम 6 बजे के करीब उनके पिता को समरस हॉस्टल में बिना ऑक्सीज़न वाली एम्ब्युलेंस के ले आया गया था। पर उन्हें इस बारे में सिविल या समरस किसी के भी तरफ से कोई भी जानकारी नहीं दी गई। 
उल्लेखनीय है की कोरोना महामारी के दौरान कई परिवारों ने डॉक्टर पर मरीज का ढंग से इलाज नहीं करने का आरोप लगाया गया है। कई बार ऐसा होता है की मरीज के परिवार को पता ही नहीं होता की उनके घर के सदस्य कहा और क्या इलाज ले रहे है, उनकी हालत कैसी है? इसके अलावा तो कई बार मौत के बाद भी घंटो तक मरीज के परिजनोंको इस बारे में सूचना नहीं दी जाती। 

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