सूरत में अंगदान से सात लोगों को नई जिंदगी, हैदराबाद तक 940 किमी की दूरी 160 मिनट में काटकर फेफड़ा प्रत्यारोपण

ब्रेन डेड कामिनिबेन के अंगदान से पुर्व श्रध्दांजली देते परिवार के सदस्य

सूरत से कोरोनाकाल के दौरान गुजरात के बाहर ह्रदय और फेफडा प्रत्यारोपण का प्रथम किस्सा रविवार को दर्ज हुआ, ह्रदय मुंबई में और फेफडो को हैदराबाद के अस्पताल भर्ती मरीज में प्रत्यारोपण किया गया।

ब्लड प्रेशर के बाद ब्रेन हेमरेज कामिनीबेन को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया
सूरत से अंगदान कोरोना काल में भी वैसा ही रहा है। लेउवा पटेल पाटीदार समाज के ब्रेनडेड कामिनीबेन भरतभाई पटेल के परिवार ने दिल, फेफड़े, किडनी, लीवर और आंखें दान कर सात लोगों को जिंदा किया है। 
कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के बाद गुजरात के सूरत से हृदय और फेफड़े के दान का यह पहला मामला है।  सूरत से मुंबई तक की 300 किलोमीटर की दूरी 100 मिनट में तय करने के बाद मुंबई के सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में एक 46 वर्षीय महिला में हृदय काप्रत्यारोपण हुआ है।
जबकि सूरत से हैदराबाद की 940 किमी की दूरी को 160 मिनट में काट दिया गया है और किम्स अस्पताल में महाराष्ट्र के जलगांव की एक 31 वर्षीय महिला में फेफड़े का प्रत्यारोपण किया गया है। जबकि एक गुर्दा प्रत्यारोपण अहमदाबाद के स्टर्लिंग अस्पताल में किया गया है और दूसरा गुर्दा और यकृत प्रत्यारोपण आईकेडीआरसी, अहमदाबाद में किया गया है।
17 मई को सुबह छह बजे कामिनीबेन बिस्तर से उठने वाली थीं, लेकिन उठी नहीं पायी तो परिवार ने डॉक्टर को बुलाया और उन्होंने उसकी जांच की और कहा कि उसका रक्तचाप बहुत अधिक है। उन्हें सीटी स्कैन के लिए बारडोली के सरदार स्मारक अस्पताल ले जाया गया और पता चला कि उन्हें ब्रेन हैमरेज है।आगे के इलाज के लिए उन्हें न्यूरोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. दिव्यांग शाह के इलाज के तहत सूरत के शेल्बी अस्पताल में भर्ती कराया गया। न्यूरोसर्जन डॉ. मिलन सेजलिया ने मस्तिष्क में रक्त का थक्का निकालने के लिए क्रैनियोटॉमी की।
शनिवार 5 जून को न्यूरोफिजियोलॉजिस्ट  डॉ. दिव्यांग शाह, न्यूरोसर्जन डॉ. मिलन सेजलिया, इंटेंसिविस्ट डॉ. अरुल शुक्ला और डॉ. हेतल रुदानी ने कामिनीबेन को ब्रेनडेड घोषित किया। डॉ. अरुल शुक्ला ने ऑर्गन डोनेट लाइफ से संपर्क किया।डोनेट लाइफ टीम ने कामिनीबेन के पति भरतभाई, बेटे अनिकेत, भाई संजयभाई और परिवार के अन्य सदस्यों को अंगदान के महत्व और पूरी प्रक्रिया पर चर्चा करने उन्हे जरूरी जानकारी दी।
कामिनीबेन के पति भरतभाई, जो अमेरिका के टाइनी स्माइलिंग फेसेस ग्रुप और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े हैं। वे बारडोली जिले में कोविड-19 महामारी के दौरान आइसोलेशन वार्ड के मरीजों और कर्मचारियों के लिए भोजन, दवा और विभिन्न चिकित्सा उपकरणों के वितरण की व्यवस्था कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी ब्रेन डेड है और उसकी मृत्यु निश्चित है, अंगदान के माध्यम से अधिक से अधिक अंग विफलता रोगियों का कायाकल्प करें और उनके और उनके परिवारों के लिए खुशी लाएं।
आणंद के चारूसेट विश्वविद्यालय में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे पुत्र अनिकेत ने भी कहा, ''मुझे अपनी मां के फेफड़े ऐसे समय में दान करने की जरूरत है, जब कोविड के दौर में कई लोगों के फेफड़े खराब हो गए हैं। ताकि कोविड की महामारी के दौरान जिनके फेफड़े खराब हो गए उन्हें नया जीवन मिल सके।परिवार से अंगदान की सहमति मिलने के बाद नीलेश मंडलेवाला ने  स्टेट ओर्गन संस्था सोटो संयोजक डॉ. प्रांजल मोदी से संपर्क किया और किडनी, लीवर, हृदय और फेफड़े दान करने के लिए कहा । चूंकि गुजरात में हृदय प्रत्यारोपण के लिए कोई मरीज नहीं थे, इसलिए रिजलनल ओर्गन संस्था (रोटो)  मुंबई को सोटो द्वारा संपर्क किया गया था। रोटो मुंबई द्वारा सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल, मुंबई को दिल आवंटित किया गया था।
नेशनल ओर्गेन डोनेट संस्था (नोटो) द्वारा किम्स अस्पताल, हैदराबाद को फेफड़े आवंटित किए गए थे। जबकि एक किडनी सोटो द्वारा स्टर्लिंग अस्पताल, अहमदाबाद को और एक किडनी और लीवर  अहमदाबाद को आवंटित किया गया था।  सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल, मुंबई से डॉ. संदीप सिन्हा, डॉ. रोहित और उनकी टीम ने हृदयदान स्वीकार किया।  हैदराबाद से किम्स अस्पताल  के डॉ विवेक सिंह और उनकी टीम ने फेफड़ों का दान स्वीकार किया। डॉ. प्रांजल मोदी और उनकी टीम ने गुर्दो और जिगर का दान स्वीकार किया । लोकदृष्टि आई बैंक के डॉ. प्रफुल्ल शिरोया ने नेत्रदान स्वीकार किया।
सूरत के शेल्बी अस्पताल से मुंबई का 300 किलोमीटर का अंतर 100 मिनट में काटकर मुंबई के सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में डॉ अन्वय मुले और उनकी टीम द्वारा  एक 46 वर्षीय महिला में हृदय प्रत्यारोपण किया गया। हैदराबाद के किम्स अस्पताल में महाराष्ट्र के जलगांव के रहने वाली 31 वर्षीय महिला में  डॉक्टर संदीप अट्टावर और उनकी टीम ने फेफडो का प्रत्यारोपण किया। 
कोविड-19 महामारी के कारण इस महिला के फेफड़े खराब हो गए थे और उसकी उपचार एकमो मशीन पर चल रही थीं। कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के बाद डोनेट लाइफ के जरिए गुजरात से दिल और फेफड़े के दान का यह पहला मामला है।
सूरत के शेल्बी अस्पताल से अहमदाबाद के आईकेडीआरसी अस्पताल तक 264 किलोमीटर का  सड़क अंतर को 190 मिनट में काटकर अहमदाबाद की रहने वाली 30 वर्षीय महिला में किडनी ट्रांसप्लांट कराया। अन्य किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट अहमदाबाद की 27 वर्षीय महिला और भावनगर के 58 वर्षीय व्यक्ति किया गया है। मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद में हृदय, फेफड़े और गुर्दे की समय पर डिलीवरी के लिए तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। जिसमें सूरत शहर पुलिस के साथ-साथ राज्य के विभिन्न शहर और ग्रामीण पुलिस का सहयोग प्राप्त हुआ।

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