अब 6 महीने तक सहेज कर रखने होंगे गुजरात के पुलिस थानों के सीसीटीवी फुटेज

गुजरात हाईकोर्ट की फाइल फोटो

पलिताना में एक युवक और एक युवती की शादी हो पाती उससे पहले पुलिस ने युवक को शादी से पहले हिरासत में ले लिया। इसके कारण उच्च न्यायालय में हैबियस कोर्पस या बंदी प्रत्यक्षीकरण का गठन किया। परिवार के अनुसार युवक को थाने में पुलिस ने पीटा। इसकी शिकायत करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने थाने को सीसीटीवी फुटेज जारी करने का निर्देश दिया था।
जानकारी के अनुसार गुजरात हाई कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण के अनुरोध पर पुलिस थानों में सीसीटीवी फुटेज को 6 महीने तक सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। बता दें, इससे पहले भी हाई कोर्ट ने थाने का सीसीटीवी चालू रखने का आदेश दिया था. इस मामले में पुलिस की दलील थी कि 30 दिन के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा गया है। ऐसे में अदालत ने फैसला सुनाया कि छह महीने तक के सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित रखा जाना चाहिए। उच्च न्यायालय ने जिला पुलिस प्रमुख को उस अधिकारी की पहचान करने का भी निर्देश दिया, जिसने उसे थाने में पीटा और एक रिपोर्ट प्रस्तुत प्रस्तुत करने को कहा।
मिली जानकारी के अनुसार पलिताना में एक युवक और युवती एक दूसरे से प्रेम करते हुए भी अलग-अलग धर्म के होने के कारण भाग गए थे। उन्होंने मैरिज रजिस्ट्रार के पास शादी का रजिस्ट्रेशन कराया। तीस दिन बाद नोटिस जारी होने से ठीक पहले पुलिस युवक को उठा ले गई और परिजनों ने कथित तौर पर युवक की थाने में पिटाई कर दी।

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