नवरात्रि खास : ये है सास-बहु की कुछ जोड़ियाँ, गरबा खेलने में जिनका हैं अपना अलग स्वैग

(Photo Credit : sandesh.com)

बीते दो साल कोरोना के कारण गरबा न खेल पाने वाले लोग इस साल जमकर खेल रहे है शेरी गरबा

इस वर्ष नवरात्रि के पूरे होने में कुछ ही दिन शेष बचे है। कोरोना के कारण बीते दो सैलून से गरबा का आनंद ना ले पाने वाले लोग इस साल अपने गली-मोहल्ले में जमकर गरबा खेलते हुए नजर आये। ऐसे में आज हम आपसे गुजराती सास-बहु की जोड़ी के बारे में बात कर रहे हैं, जिनके रग-रग में गरबा बसा हुआ है।
अहमदाबाद के पालड़ी इलाके की रहने वाली हेतलबेन पारेख का कहना है कि ईश्वर की कृपा से मुझे बेहद प्यारी और साथ देने वाली सास मिली है और मैं इसकी वजह से खुश हूं। लेकिन नवरात्रि हो तो क्या पूछें। हम सालों से शेरी गरबा खेल रहे हैं और हम साथ में गरबा खेल रहे हैं। आखिरी दिन हम सुबह 6 बजे तक गरबा खेलते हैं। वह आगे कहते हैं कि भले ही मेरी शादी को 22 साल हो गए हों, लेकिन मेरी सास मुझसे ज्यादा प्यार करती हैं और उन्हें मुझसे ज्यादा गरबा का शौक है। जब भी ढोल बजता है तो हमारे पैर न घर में रह पाते है और न ही किचन में। हम अपना काम पहले ही खत्म कर लेते हैं। मेरे ऑफिस से निकलने से पहले मेरी सास भी खाना बना चुकी होती है ताकि गरबा ज्यादा समय तक खेल सके। उनका सहयोग मेरे शौक को पूरा करता है। कई बार लोग हमें अंत तक गरबा खेलते हुए देखते हैं और कहते हैं कि वाह, सास-बहू की जोड़ी ने रंग जमा रखा है।
गुजरात के आणंद में रहने वाली सास-बहु की जोड़ी भी खास है। सास दक्षबेन सोलंकी और बहू वैष्णवी सोलंकी हमेशा एक साथ गरबा खेलते हैं। कहा जाता है कि इन दोनों सासों को गरबा बेहद पसंद है। वे हमेशा नवरात्रि के नौ दिनों की तैयारी में लगे रहते हैं। इसके लिए वे 15 दिन पहले से ही खरीदारी शुरू कर देते हैं और हर तरह की ज्वैलरी और ब्यूटी ट्रीटमेंट भी पहले से तैयार कर लेते हैं। इस बारे में ये कहते हैं कि नवरात्रि हमारे घर में 9 दिन नहीं बल्कि महीनों तक चलती है। सास दक्षबेन कहती हैं कि मैं भी सादा गरबा खेलती हूं और बहु के साथ स्टेप सीखती हूं और नए अंदाज में गरबा खेलती हूं। मुझे गरबा का शौक है और वहू को भी गरबा खेलने का शौक है इसलिए हमारी जोड़ी खास बन गई है। इसके अलावा परिवार की बात करें तो हमारे दोनों के पति गरबा के शौकीन नहीं हैं, लेकिन इन दिनों हमारे लिए गरबा खेलने को तैयार रहते हैं। नवरात्रि कलेक्शन की बात करें तो हम दोनों के पास चनाचोली की 9-10 जोड़ी का कलेक्शन है। लेकिन फिर भी हम नए स्टाइल के गहने और स्कार्फ आदि लेने जा रहे हैं।
वहीं अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके की रहने वाली वहू पिया कलवानी और सास सुनीता कलवानी भी गरबा के शौकीन हैं। वे हमेशा एक साथ गरबा खेलते हैं। बात अगर इस परिवार की करें तो सास-बहू के साथ परिवार को गरबा का शौक है। बहुत पिया कहती है "हम हर साल प्यार से गरबा खेलते हैं। मेरी और मेरी सास की जोड़ी हमारे समाज में काफी चर्चित है। नवरात्रि की तैयारियों की बात करें तो हम प्रदर्शनी के दौरान एक्सेसरीज और चनियाचोली की खरीदारी करते हैं। इसके अलावा दुपट्टे की बात करें तो लो गार्डन के चानियाचोली बाजार से करते हैं। यहां हम मोलभाव करके कई वैरायटी में से इनका चयन करते हैं। वे आगे कहते हैं कि हमारे पास 8-9 जोड़ी चनियाचोली है। गरबा की बात करें तो हम केवल सिंपल गरबा, तीन ताली और रास गरबा खेलते हैं। हमें इसमें बहुत आनंद भी मिलता है। 8 बजते ही हम घर के सारे काम खत्म कर तैयार होने लगते हैं और साथ ही गरबा खत्म होने तक खेलते रहते हैं।

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