जानें किसने कहा, 'अब तो मतलब का नाम महात्मा गांधी हो गया है!'

तुषार गांधी

गुजरात के वलसाड जिले में एक निजी स्कूल के कार्यक्रम में आयोजित हुए वक्तृत्व स्पर्धा में 'मेरा आदर्श नाथूराम गोडसे' विषय पर हुए विवाद के बाद पहली बार महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने वलसाड की मुलाकात ली।
नवसारी के दांडी गांधी मेले के उद्घाटन में आए तुषार गांधी ने वलसाड के ही गांधी प्रेमी धनसुख भाई मिस्त्री के बंगले में बने गांधी म्यूजियम की मुलाकात भी ली थी। यहां विवादास्पद वक्तृत्व स्पर्धा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों में हिंसा की प्रेरणा का सिंचन हो रहा है। ऐसे में आगे बढ़कर यह संस्कार हिंसा का स्वरूप ही लेगी। उन्हें यह समझ नहीं आता कि जिन लोगों को गांधीजी पसंद नहीं है वह उन्हें छोड़ने के बजाय बच्चों में हिंसा का प्रचार क्यों करते हैं? इससे वह भविष्य में कैसा समाज बनाना चाहते हैं यह उनकी चिंता का विषय है।
तुषार गांधी ने कहा कि पहले के समय में कहावत थी कि 'मुंह में राम बगल में छुरी' पर शायद अब उसे बदलकर 'होठों पर गांधी दिल में गोडसे' कर देना ही उचित लग रहा है। इस तरह से उन्होंने वर्तमान में चल रही राजकीय तथा देश की परिस्थिति पर कटाक्ष भी किया था।
विवादास्पद वक्तृत्व स्पर्धा के बारे में गांधी विचार प्रचार मंच के प्रखर गांधीवादी लोगों ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इस बारे में तुषार गांधी ने कहा कि अब सरकार के सामने बोलने की किसी की हिम्मत नहीं रही है। गांधी विचार वाले बाहर आने से भी डरते हैं। ऐसे में सभी गोडसे की भक्ति करना ही अपना कर्तव्य मान रहे हैं।

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