गुजरातः कोरोना में जन सहयोग का उत्तम उदाहरण यानी नारी शक्ति

भुज में दाह संस्कार की कार्यवाही संभाल रही है सेविकाएं

भुज में दाह संस्कार की कार्यवाही संभाल रही है सेविकाएं

जन सहयोग एवं महिला शक्ति का जीता जागता उदाहरण यानी कच्च  जिले के भुज तालुका के श्री सुखपर सार्वजनिक हिंदू स्मशान भूमि। सबके साथ सहयोग से कोरोना को मात देने का यह मंत्र सुखपर में सेविकाएं सार्थक बना रही हैं। कोरोना काल में कोविड-19 से मृत्यु प्राप्त लोगों के मृतहेद को हिन्दू धार्मिक क्रिया की कार्रवाई  राष्ट्र सेवा समिति की 15 उन्नीस सेविकाएं कर रही है।    छह दिनों से प्रारंभ इस कार्यवाही में  ग्रामीण महिलाएं श्मशान की सफाई से लेकर लाशों का दाह-संस्कार करने तक का काम बड़े साहस के साथ कर रही हैं। हाल में कोरोना के स्मशान भूमि से जुड़े रामजीभाई वेलाणी ने कहा कि संक्रमण के कारण होने वाले मृत्यु के कारण तय किये गये स्मशानों में से भुज खारी नदी स्मशान भूमि एवं सुखपर गाम स्मशान भूमि पर कोविद -19 के शव का अंतिम संस्कार करने के प्रशासन के अनुरोध के बाद अंतिम संस्कार  यहां छह दिनों से  हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार किया जा रहा है।  पूरा वेलानी परिवार इस  अभियान  में शामिल है। सुबह 8 से रात 8 बजे तक अंतिम संस्कार की कार्यवाही में महिलाएं  शामिल होती हैं। भुज की जी.के जनरल अस्पताल और निजी अस्पतालों से आने वाले कोविड -19 के सभी शवों का यहां खारी नदी में अंतिम क्रिया (दाह संस्कार)  किया जाता है। रामपर-वेकरा, भुज, मानकुवा और सुखपर के लगभग 50 पुरुष सेवक भी इस काम में शामिल हैं। सुखपर स्वामीनारायण मंदिर, स्वामीनारायण प्रसादी गांव की कई बहनें, सुखपर में राष्ट्र सेवा समिति की नौकरानियों के साथ अपना सहयोग दे रही हैं। लाशों के लिए फूल; पूजनविधि की सामग्री तथा इस काम में जुड़ी सेविकाएं एवं सेवक भाइयों के भोजन की व्यवस्था करके अपनी राष्ट्रीय सेवा भी कर रही हैं। वर्तमान में कच्छ में लगभग एक हजार सेविका बहनें हैं। जिन्होंने पिछले वर्ष कोरोना में  मास्क बनाना, वितरण करना, राशन किट बनाना और वितरित करना, दवाई पैड बनाना, टिफ़िन परोसना आदि जैसे कई गतिवि‌धियां की है। 

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