गुजरात : 22 दिनों से आंदोलन पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने की राज्यपाल से इच्छामृत्यु की मांग

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कोरोना संक्रमण के कम होने पर निकाल दिया गया था नौकरी में से, किसी भी अधिकारी द्वारा नहीं निकाला गया समाधान

पिछले डेढ़ साल से देश भर में कोरोना महामारी ने अपना कहर ढाया हुआ है। महामारी के दौरान डॉक्टर, पुलिस और सफाई कर्मचारियों ने सभी को कोरोना के संक्रमण से बचा कर रखने के लिए अपनी पूरी कोशिश की थी। महामारी की दूसरी लहर के दौरान तो हालात ऐसे हो गए थे कि राज्य के लगभग सभी अस्पतालों में मरीजों का ओवरफ़्लो हो गया था। जिसके चलते सफाई कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ की भी अस्पतालों में कमी होने लगी। 
अस्पताल में स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल प्रशासन द्वारा कई कर्मचारियों को भर्ती किया गया था। हालांकि अब जैसे जैसे कोरोना का संक्रमण कम होने लगा तो कई अस्पतालों द्वारा सफाई कर्मचारियों को उनकी नौकरी पर से निकाल दिया गया था। सुरेन्द्रनगर के गांधी हॉस्पिटल में से भी इसी तरह 7 कर्मचारियों को निकाल दिया गया था। जिसके चलते कर्मचारियों ने अस्पताल प्रशासन को अपनी इस समस्या के लिए आवेदन दिया था। हालांकि बार-बार आवेदन देने के बाद भी कर्मचारियों की समस्या का कोई समाधान नहीं निकला था। 
बार-बार आवेदन देने के बाद भी समस्या का निराकरण ना आने के चलते सफाई कर्मचारी पिछले 22 दिनों से आंदोलन पर बैठे थे। पर 22 दिनों के बाद भी किसी तरह का समाधान ना आने पर सभी सफाई कर्मचारियों ने जिला तबीबी अधिकारी, डीडीओ और कलेक्टर को भी इस बारे में आवेदन दिया था । ओर इसके बाद भी अभी तक किसी भी अधिकारी ने उनकी आवेदन का कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया था। यही नहीं किसी ने उनकी मुलाक़ात भी नहीं की थी। जिसके चलते सातों सफाई कर्मचारी ने मुख्यप्रधान, राज्यपाल के पास इच्छामृत्यु की मांग की है। 

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