गुजरात : कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस या म्युकोरमाईकोसिस के संक्रमण से जूझ रहे हैं लोग

(Photo Credit : Wikimedia Commons)

कोरोना से ठीक होने वालों लोगों के इस बीमारी के चपेट में आने की आशंका, 300 सेअधिक मामले आए सामने

कोरोना महामारी से जूझ रहे देश में एक और खतरा सामने आ रहा है। दिल्ली और गुजरात में कोरोना संक्रमण को मात देने वाले लोगों को ब्लैक फंगस यानी काली फफूंद का अटैक देखने को मिल रहा है। गुजरात के कई शहरों में इसके कारण होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है। यह बीमारी अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, सूरत और मोरबी सहित जिलों में फैल गई है। कोरोना के लिए आवश्यक इंजेक्शन के बाद अब इसके निवारक इंजेक्शन की कमी है। ब्लैक फंगस या म्युकोरमाईकोसिस के उपचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शनों की संख्या कम हो गई है। अब प्रशासन रेमेडीसविर की तरह इस इंजेक्शन के काले बाजार को लेकर चिंतित है।
आपको बता दें कि रेमेडिविर के बाद अब बाजार में म्युकोरमाईकोसिस के इंजेक्शन की कमी है। राजकोट को ब्लैक फंगस या म्युकोरमाईकोसिस के इंजेक्शन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीमारी के मामलों में लगातार वृद्धि से इस बीमारी में उपयोगी एम्फोमुल इंजेक्शन की कमी हो गई है। इसके इंजेक्शन की कीमत 1700 रुपये है। जानकारी के अनुसार सिर्फ राजकोट में इसके 300 से अधिक मामले सामने आए हैं। साथ ही ये देखा गया हैं कि कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों में इस बीमारी के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है। इस बीमारी ने पिछले 15 दिनों में कई लोगों की जान ले ली है। इस बीमारी को रोकने के लिए मुख्य इंजेक्शन राजकोट में कहीं भी उपलब्ध नहीं है। इंजेक्शन न मिलने के कारण मरीज के परिजन पिछले तीन दिनों से संघर्ष कर रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना के साथ साथ इस बीमारी के नए मामले भी उभर रहे हैं। पहले म्युकोरमाईकोसिस के असर आंखों और मुंह पर ही देखे गए थे। लेकिन अब ये मस्तिष्क में भी फ़ैल रहा हैं और इससे लोग मर रहे हैं। ऐसे में ब्लैक फंगस या म्युकोरमाईकोसिस वाले रोगियों के लिए राजकोट सिविल अस्पताल के मनोरोग वार्ड में 30-बेड की सुविधा वाला वार्ड बनाया गया है। कोरोना से उबरने वाले लगभग 250 रोगियों की वर्तमान में निगरानी की जा रही है ताकि वे इस गंभीर बीमारी के शिकार न हों। कोरोना रोगियों के ठीक होने के बाद पिछले एक सप्ताह से कोरोना में यह गंभीर बीमारी देखी गई है। उसके मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में राजकोट प्रशासन सतर्क हो चुके है।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें